हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह सहित प्रदेश के चार अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलेगी।
एचपीसीए मामले में मुख्यमंत्री, डीजीपी संजय कुमार, डीसी और एसपी कांगड़ा को व्यक्तिगत तौर पर प्रतिवादी बनाए जाने के लिए दाखिल याचिका को हिमाचल हाइकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि संभावित प्रतिवादियों पर प्रथम दृष्टतया कोई मामला नहीं बनता है।
साबित करें कि कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण की गई
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण या पक्षपातपूर्ण कार्यवाही करने के आरोप लगाए जाते हो तो प्रार्थी को दर्शाना होगा कि उसके विरुद्ध कि गई कार्यवाही दुर्भावनापूर्ण या पक्षपातपूर्ण रवैये से अमल में लाई गई।
उस आवेदन को भी खारिज कर दिया जिसके तहत आर डी नजीम रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी को भी प्रतिवादी बनाने की गुहार लगाईं गई थी।
ध्यान रहे कि इस मामले में हाई कोर्ट ने आठ जनवरी को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, डीजीपी संजय कुमार, डीसी कांगड़ा सी पाल रासू और कांगड़ा के एसपी बलबीर सिंह को निजी तौर पर प्रतिवादी बनाए जाने के लिए दायर किये गए आवेदन को ठुकरा दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा सुनवाई के लिए कहा था
इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी थी और सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट के निर्णय को निरस्त कर दिया था और इन आवेदनों पर दोबारा सुनवाई करने के पश्चात फैसला सुनाने के आदेश दिए थे।
प्रदेश सरकार ने एचपीसीए की लीज को रद्द कर दिया था। साथ ही क्रिकेट स्टेडियम की प्रापर्टी को रातोंरात कब्जे में ले लिया था। एचपीसीए ने अपने आवेदन में आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कहने पर प्रशासन ने पुलिस बल प्रयोग कर धर्मशाला और अन्य स्टेडियमों को अपने कब्जों में लिया था, जोकि एक द्वेषपूर्ण कार्रवाई थी।
आवेदन में यह भी आरोप था कि एचपीसीए के खिलाफ जो भी कार्रवाई की गई है, वह सीएम के इशारे पर ही की गई।