हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा में गीतांजलि पब्लिक स्कूल घलोल (धनेटा) हमीरपुर के अथर्व ठाकुर ने 98.71 फीसदी अंक लेकर टॉप किया है। शिक्षक हरदीप ठाकुर के बेटे अथर्व ने 700 में से 691 अंक हासिल किए हैं। बोर्ड की दसवीं परीक्षा में इस बार सरकारी स्कूल बुरी तरह पिछड़ गए है। टॉप टेन मेरिट सूची में 39 में से सरकारी स्कूल की मात्र एक ही छात्रा जगह बना पाई है।
मैट्रिक के सभी विद्यार्थियों को दो फीसदी ग्रेस मार्क्स देने के बावजूद पिछले साल के मुकाबले परिणाम करीब तीन फीसदी कम रहा है। परीक्षा परिणाम 60.79 फीसदी रहा है। मैट्रिक के पहले तीन स्थानों में कुल छह विद्यार्थियों में तीन लड़के और तीन लड़कियां हैं। दसवीं में चार साल बाद किसी लड़के ने टॉप किया है।
हालांकि, मेरिट में लड़कियों का ही दबदबा है। सरस्वती विद्या मंदिर हाई स्कूल मरही (मंडी) के पारस पुत्र नरेश कुमार, एस विद्या मंदिर हाई स्कूल नम्होल (बिलासपुर) के ध्रुव शर्मा पुत्र शशि शर्मा और एंग्लो संस्कृत मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल (मंडी) की रिधि शर्मा पुत्री हितेश शर्मा ने 98.57 फीसदी (690/700) अंक लेकर संयुक्त रूप से दूसरा स्थान हासिल किया।
ग्लोरी इंटरनेशनल स्कूल रोहडू (शिमला) की कोंपल जिंटा पुत्री विनय जिंटा और गीतांजलि पब्लिक स्कूल घलोल (धनेटा) हमीरपुर की साक्षी पुत्री सतीश चड्ढा ने 98.43 फीसदी (689/700) अंक लेकर संयुक्त रूप से तीसरा स्थान पाया है।
शैक्षणिक सत्र 2018-19 में दसवीं में प्रदेश भर से 111980 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे। इसमें 67319 परीक्षार्थी पास जबकि 6395 की कंपार्टमेंट आई है। उधर, बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि सोमवार को दसवीं का परिणाम घोषित कर दिया है। 13 मई तक 500 रुपये शुल्क के साथ उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन और 400 रुपये के साथ पुनर्निरीक्षण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ऊना की निधि ने बचाई 2750 सरकारी स्कूलों की लाज
हिमाचल में करीब 2750 उच्च और सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इसमें से मात्र ऊना के घनारी स्कूल की निधि ही मेरिट में दसवां स्थान पाने में सफल हुई। निधि ने 682 अंक हासिल किए हैं। मैट्रिक के टॉप-10 में शामिल कुल 39 विद्यार्थियों में से 38 विद्यार्थी प्राइवेट स्कूलों से हैं। तमाम दावों के बावजूद सरकारी स्कूलों के पिछड़ने के कई कारण है। आठवीं तक फेल न करने की नीति भी इसका एक कारण है। सरकारी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा के अलावा, किताबें, परिवहन सुविधा और वर्दी भी दी जाती है।
39 में से 28 लड़कियां आईं मेरिट सूची में
मैट्रिक की मेरिट सूची में भले ही पहला स्थान पाने में छात्र कामयाब रहा हो, लेकिन टॉप-10 में नाम दर्ज करवाने में लड़कियों के मुकाबले लड़के फिर पिछड़ गए हैं। टॉप-10 में शामिल कुल 39 विद्यार्थियों में से 28 लड़कियां, जबकि 11 लड़के शामिल हैं। कांगड़ा और मंडी जिले से मेरिट में आठ-आठ बच्चे हैं।
पिछले तीन साल में सबसे कम परिणाम
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड का मैट्रिक की वार्षिक परीक्षा परिणाम पिछले तीन साल के मुकाबले सबसे कम है। साल 2015-16 में 66.88 फीसदी परिणाम था, जबकि 2016-17 में 87.57 और 2017-18 में 63.39 फीसदी परिणाम था। इस साल पिछड़कर 60.79 फीसदी पहुंच गया।