राज्य बिजली बोर्ड ने प्रदर्शनी में वर्ष 1971 से वर्ष 2021 तक की यात्रा का वृतांत दिया।
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राज्य बिजली बोर्ड ने प्रदर्शनी में वर्ष 1971 से वर्ष 2021 तक की यात्रा का वृतांत दिया। यह एक संयोग का विषय रहा कि प्रदेश के पूर्ण राज्य के 50 साल पूरे होने के साथ राज्य बिजली बोर्ड को बने भी 50 साल हो गए हैं। प्रदर्शनी में बिजली बोर्ड सहित प्रदेश के विद्युत क्षेत्र के विकास में लगी 6 इकाइयों ने भी अपने-अपने 50 साल की प्रगति को दर्शाया।
बिजली बोर्ड ने अपनी यात्रा में बताया कि बिजली बोर्ड का जन्म 1 सितंबर 1971 को हुआ था। वह तब से बिजली के उत्पादन संचार और वितरण का काम देख रहा था। उसके बाद विद्युत सुधार के चलते प्रदेश में विद्युत विकास के लिए भी विभिन्न विद्युत विकास इकाइयों का गठन हुआ। बोर्ड का पुनर्गठन भी 2010 में किया गया। उसे मूल रूप से विद्युत वितरण का काम 1971-72 में सौंपा गया था।
पर्यटन विभाग ने प्रदर्शनी में दिखाई नई योजनाएं
स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान पर्यटन विभाग की प्रदर्शनी में नई योजनाओं से अवगत कराया गया। पर्यटन को प्रदेश की आर्थिकी का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए आने वाले वर्षों में किए जाने वाले कार्यों की जानकारी दी। विभागीय अधिकारियों ने मॉडल और चित्रों से दर्शाया कि किस प्रकार नई मंजिल नई राहें योजना से चांशल घाटी को स्कीइंग के लिए विकसित किया जाएगा।
जंजैहली में इको टूरिज्म, बीड़ बिलिंग में एयरो स्पोर्ट्स, महाराणा प्रताप सागर, तत्तापानी और लारजी में वाटर स्पोर्ट्स और राजगढ़ व चूड़धार में नए पर्यटन स्थल विकसित किए जाएंगे। विलेज और धार्मिक पर्यटन को लेकर बनाई जा रहीं योजनाएं भी दर्शाई गईं। रोप वे और होम स्टे योजना की जानकारी भी दी गई। उधर, ऊर्जा विभाग ने भी प्रदर्शनी लगाकर प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को उत्पादित करने को लेकर बनाई गई योजनाओं से अवगत कराया।