हिमाचल की जेलों में बंद कैदियों के हुनर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए हिमाचल कारागार विभाग ने नई पहल की है। प्रदेश की जेलों में बनने वाले उत्पादों की देशभर में बिक्री के लिए विभाग ने ‘कारा बाजार’ नाम से वेबसाइट तैयार की है।
अधिकारी इस वेबसाइट को फाइनल कर नए साल पर लांच करेंगे। इस वेबसाइट पर सूबे की जेलों में बनने वाले पिज्जा-केक जैसे खाने के उत्पादों से लेकर कपड़ों की बिक्री की जाएगी। जेल के उत्पादों पर वैट नहीं लगता और इनमें मार्जिनल प्रॉफिट का प्रावधान है। ऐसे में इन जेलों के उत्पाद बाजार में राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय उत्पादों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।
प्रदेश के दो केंद्रीय कारागार और दो जिला कारागारों समेत कुल 14 जेलों व सब जेलों में दो हजार से ज्यादा कैदी बंद हैं। इनमें से आधे से ज्यादा कैदी कपड़ा बुनने और बेकरी उत्पाद बनाने के काम में लगे रहते हैं। डीजी जेल सोमेश गोयल ने बताया कि प्रदेश का कारागार विभाग हर हाथ को काम के सिद्धांत पर काम कर रहा है। यही कारण है कि प्रदेश की जेलों में बंद कैदी सिलाई-बुनाई और बेकरी उत्पाद व खाना बनाने के अलावा बढ़ईगिरी, ड्राई क्लीनिंग, डेयरी फार्मिंग, टेलरिंग जैसे काम करते हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े
आंकड़ों की बात करें तो साल 2015 में 12 हजार मीटर विभिन्न तरह के कपड़ों को कैदियों ने बुना। साथ ही अपने लिए खुद 1200 यूनिफार्म, 1093 कंबल, 175 दरी और 200 शॉल तैयार किए। साल भर में कई टन केक, पिज्जा, ब्रेड, बिस्कुट जैसे बेकरी के उत्पादों को भी तैयार कर खुद ही बेचा। इस दौरान हुई कमाई से जेल विभाग ने 1200 कैदियों को करीब 71 लाख रुपये बतौर भत्ता भी वितरित किया।
नामचीन होटलों में ली ट्रेनिंग
जेल विभाग ने बेकरी उत्पाद बनाने के इच्छुक कैदियों को खास ट्रेनिंग भी दिलाई। इसमें कइयों को रेडिसन ग्रुप के होटलों में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। स्थानीय होटलों में भी खाद्य उत्पाद बनाने के लिए लगातार भेजा जाता रहा। डीजी जेल सोमेश गोयल ने बताया कि जेलों में बनने वाले उत्पादों के निर्माण के दौरान होटलों की तरह ही गुणवत्ता और किचन की सफाई का खास खयाल रखा जाता है।
पहले भी की हैं कई ई-पहल
हिमाचल कारागार विभाग वेबसाइट से पहले भी कई तरह की ई-पहल कर चुका है। देशभर में परिवार के साथ बंदियों की वीडियो चैट कराने वाला हिमाचल का जेल वार्ता सॉफ्टवेयर खासा लोकप्रिय है। इसके अलावा ई-पेशी सॉफ्टवेयर के जरिये हिमाचल कैदियों की पेशी बिना कोर्ट ले जाए करा रहा है।