राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ठोस कचरे के निस्तारण मामले में अदालत के आदेशों की अनुपालना करते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। बोर्ड ने बताया कि करीब 13 संस्थाएं इस पर काम कर रही हैं। अगर कोई व्यक्ति या संगठन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका चालान काटने का काम सबसे बड़ी संस्था करती है। अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय को अपने पिछले आदेश में ठोस कचरे के निस्तारण के लिए क्या कदम व योजनाएं बनाई हैं, इस पर रिपोर्ट पेश करने को कहा था।
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने की। अदालत में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव अनिल जोशी व्यक्तिगत तौर पर पेश हुए। अदालत ने सचिव से पूछा कि ठियोग, नारकंडा व अन्य स्थानों पर शौचालय बहुत ही गंदी हालत में हैं। जगह-जगह प्लास्टिक व कूड़े के ढेर लगे हैं। इसके निवारण के लिए विभाग क्या कर रहा है। इस पर बोर्ड की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में बताया गया कि स्थानीय निकायों के लिए कोई भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का एक्शन प्लान नहीं बनाया गया है। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई पर अपनी रिपोर्ट जमा करवाने को कहा है। मामले को अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी।