भाजपा मीडिया विभाग के प्रभारी रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के फैसले और उच्च न्यायालय का निर्णय यह साबित करता है कि वर्तमान सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हो गई है। उच्च न्यायालय ने पर्यटन विभाग के 18 होटल बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार तो पर्यटन बढ़ाने की गुणगान करती है, शायद उन्होंने इन होटलों को लाभ में लाने का प्रयास ही नहीं किया। क्या इस केस की भी उनकी मित्र मंडली ने पैरवी नहीं की। मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या इस निर्णय को लेकर सरकार अपील करेगी या इन होटलों को अपने बचे हुए मित्रों को लीज पर देगी। अब तो इस सरकार में तबादला माफिया भी सक्रिय हो गया है। तबादला माफिया का सरगना मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में है। सरकार का स्वयं उनको संरक्षण है। ईडी की गिरफ्तारियां इन आरोपों को सिद्ध करती हैं।
शर्मा ने कहा कि राजनीतिक गलियारों में सीपीएस के निर्णय की चर्चा है। ऐसी क्या मजबूरी है कि मुख्यमंत्री अपने मित्रों को बचाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री मजबूर मुख्यमंत्री है, जो आर्थिक खजाने के खाली होने का रोना रोते हैं और दूसरी ओर सीपीएस का खर्च रोकना नहीं चाहते हैं। मुख्यमंत्री की छवि अच्छे निर्णय लेकर बनती है ना की टॉयलेट टैक्स या समोसा की जांच से बनती है। यह सब निर्णय हास्यास्पद हैं। वर्तमान सरकार माफिया राज के दबदबे में काम कर रही है। यह माफिया ऊना, सिरमौर, बीबीएन और कांगड़ा में तेजी से फल फूल रहा है। कई जगह तो माफिया में सरकार के कर्णधार भी शामिल हैं। उच्च न्यायालय ने हिमाचल भवन दिल्ली को अटैच करने के आदेश दिए, यह गंभीर विषय है, पर मुख्यमंत्री अपनी कमियों छिपाने के लिए विपक्ष पर दोष मढ़ रहे हैं।