उन्होंने आरोप लगाया कि सहारा योजना जैसी महत्वपूर्ण पेंशन योजनाओं को बंद करने के लिए पात्र लोगों को कागजों में मृत दिखाने जैसे गंभीर प्रयास किए गए। वहीं, हिमकेयर योजना को भी कमजोर करने की साजिश रची जा रही है, जिससे गरीबों की स्वास्थ्य सुरक्षा प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में इलाज और दवाइयों की कमी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार पर प्रशासनिक पकड़ कमजोर होने का आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में ठोस कार्रवाई के बजाय लीपापोती की जा रही है।
बड़े मामलों में अधिकारियों पर कार्रवाई न होने से यह संदेह और गहरा हो गया है कि भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार में मित्र मंडल हावी है और करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए पदों का बंटवारा किया गया है। सलाहकारों को कैबिनेट रैंक और सुविधाएं देकर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है। पंचायत चुनाव जैसे सांविधानिक मुद्दे पर सरकार के निर्णयों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। जयराम ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाना आसान रास्ता चुना है। हर महीने कर्ज लेकर सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है।