हिमाचल पुलिस विभाग में पहली बार तीन स्थायी डीजी रैंक के अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। पुलिस विभाग में सिर्फ एक महानिदेशक होता था। सीआईडी और विजिलेंस में एडीजीपी की तैनाती होती थी। विजिलेंस को छोड़ सीआईडी पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट करता रहा है। ऐसा पहली बार है, जब पुलिस विभाग में तीन डीजी की तैनाती हुई हो। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने हाल ही में विजिलेंस में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति की है। डीजी अशोक तिवारी को विजिलेंस का जिम्मा सौंपा गया है।
डीएस मन्हास डीजीपी विजिलेंस भी रहे
वर्ष 2009-10 में डीएस मन्हास डीजीपी विजिलेंस रहे हैं। वहीं, सीआईडी में एसआर ओझा को मुखिया लगाया गया है। चूंकि एसआर ओझा पुलिस मुख्यालय में तैनात डीजीपी डाॅ. अतुल वर्मा से वरिष्ठ हैं। प्रदेश में वर्तमान में डीजी रैंक के 3 अधिकारी हैं, जबकि 4 केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चल रहे हैं। इनमें 1990 बैच के श्याम भगत नेगी, 1998 बैच के अनुराग गर्ग, अशोक व ऋत्विक रुद्र और 1994 बैच के राकेश अग्रवाल शामिल हैं। बीते दिनों ही राज्य सरकार ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने पर नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे वर्ष 1993 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अशोक तिवारी को महानिदेशक राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो शिमला लगाया गया।
अतुल वर्मा पुलिस प्रमुख
देखा जाए तो वर्तमान में हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक पद की कमान डाॅ. अतुल वर्मा के हाथों में है। वह 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी है। पूर्व आईपीएस संजय कुंडू के सेवानिवृत्त होने के बाद सरकार ने उन्हें पुलिस प्रमुख नियुक्त किया था। जबकि वर्ष 1989 बैच के आईपीएस एसआर ओझा जेल और उनके पास डीजीपी सीआईडी का भी जिम्मा है। सरकार का मानना है कि सीआईडी के बाद विजिलेंस में स्थायी डीजी की नियुक्ति होने से लंबित मामलों की जांच में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू स्वयं गृह विभाग देखते हैं। ऐसे में वह पुलिस महकमे को चुस्त-दुरुस्त करने में लगे हैं।