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'खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे किसान, बंजर हो रही जमीन, सरकारें खामोश'

Sat, 27 Aug 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल किसान सभा ने रैली निकाल कर प्रदेश विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। - फोटो : अमर उजाला
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शिमला में शुक्रवार को मूसलाधार बारिश के बावजूद हिमाचल किसान सभा ने रैली निकाल कर प्रदेश विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। किसान सभा ने सरकार से भूमि के नियमितीकरण को लेकर संकल्प प्रस्ताव लागू करने की मांग उठाई। सभा ने 2 सितंबर को मजदूरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का भी समर्थन किया है। रैली में तकनीकी सहायकों के आंदोलन के पक्ष में भी जोरदार नारे लगाए गए।
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पंचायत घर शिमला से लेकर प्रदेश विधानसभा तक किसानों ने रैली निकाल कर अपना विरोध जताया। किसान सभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा जाकर मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष को ज्ञापन भी सौंपा। हरियाणा से पूर्व विधायक और किसानसभा के महासचिव तथा केंद्रीय किसान परिषद के सदस्य हरपाल सिंह ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा एक ही बेल की कड़वी तुम्बड़ियां हैं, जो हमेशा किसान विरोधी फैसले लेती आई हैं।

हरपाल सिंह ने कहा कि पहाड़ हो या रेगिस्तान किसानों की दुर्दशा एक सी है। नव उदारवादी नीतियों ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। अखिल भारतीय किसान सभा के सह सचिव बीजू कृष्णन ने कहा कि बाजार में जो तुअर दाल 200 रुपये बिक रही है उसको पैदा करने वाले किसानों को उसका मात्र 30 रुपये प्रति किलो दाम मिल रहा है। देश भर में कृषि संकट के दौर से गुजर रही है जो केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों का परिणाम है।
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उन्होंने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि वे एकजुट होकर किसान विरोधी सरकारों को सत्ता से बाहर करे। हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप तंवर ने सरकार के भांग उखाड़ों अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी अमला उन खेतों से भांग उखाड़ने का काम कर रहा है जहां लोगों ने जंगली जानवरों की वजह से खाली छोड़ दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस समय लगभग 75 हजार हेक्टेयर भूमि जंगली जानवरों की वजह से बंजर पड़ी है।

सेब उत्पादक संघ के राज्य अध्यक्ष राकेश सिंघा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार अमीरों, ठेकेदारों, कंपनियों और आढ़तियों की सरकार है। शौंगटोंग में बीते छह महीने से मजदूर हड़ताल पर हैं। सरकार इनकी अनदेखी कर रही है। सिंघा ने कहा कि 2 सितंबर को मजदूरों की राष्ट्र व्यापी हड़ताल का किसान पूरी तरह समर्थन करेंगे। उस दिन देश और कृषि बंद का आह्वान है।

किसान सभा के राज्य सचिव कुशाल भारद्वाज ने कहा कि ये सरकार बंदर और सूअर प्रेमी है। किसान दिन और रात इन जंगली जानवरों से फसल बचाने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा सरकार ये न समझे कि रैली के दौरान हुई बारिश और तूफान से हिमाचल का किसान डर जाएगा। ऐसे तूफानों से किसान हर दिन जूझते हैं।

किसान सभा ने यह मांगे उठाई
- संकल्प प्रस्ताव को अविलंब लागू किया जाए। छोटे किसानों को 5 बीघा जमीन मुफ्त आवंटित की जाए।
- अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2005-06’ को प्रदेश में लागू किया जाए तथा इस कानून के तहत भूमि को नियमित करने के लिए आवेदन लिए जाएं।
- बंदरों को सभी तहसीलों में वर्मिन घोषित किया जाए।
- प्रदेश सरकार बंदरों के निर्यात को खोलने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए।
- ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग को नोडल विभाग बनाकर कृषि व बागवानी विभाग को शामिल करते हुए वन विभाग की देखरेख में बंदरों की संख्या को नियंत्रित करने की पहल करे। इसके लिए प्रशिक्षित निशानेबाजों की टीमें तैयार की जाएं।
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