इस फैसले से करीब 1300 कंप्यूटर शिक्षकों को लाभ होगा जो विभिन्न स्कूलों में वर्ष 2002 से आउटसोर्स आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। पीजीटी (आईपी) शिक्षकों की भर्ती वर्ष 2016 से लटकी है। उस समय 1191 पदों को भरने की अधिसूचना जारी की गई थी। तात्कालिक प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने इस भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पीयूष सेवल ने कहा कि पूरे देश में हिमाचल एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां केवल कंप्यूटर विषय के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पांच वर्ष के सरकारी स्कूल के शैक्षणिक अनुभव की शर्त को जोड़ा गया है और मात्र साक्षात्कार के आधार पर शिक्षकों की नियुक्तियां की जा रही हैं। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में सैकड़ों निजी एवं सरकारी संस्थान एमसीए, बीटेक, एमटेक और एमएससीआईटी आदि विषयों में डिग्रियां प्रदान कर रहे हैं। इनसे प्रतिवर्ष हिमाचल प्रदेश में 5000 से अधिक डिग्री धारक युवा निकल रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती के लिए कमीशन के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए थे। इस हिसाब से वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में कंप्यूटर डिग्री धार युवाओं की संख्या लगभग 40,000 से अधिक है । ऐसे में यदि युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में पढ़ने का मौका ही नहीं मिलेगा तो वे पांच वर्ष के अनुभव की शर्त को कैसे पूरा कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने अदालत के समक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर भी पेश किया है।