हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अटल टनल के आसपास कचरे को रोकने के लिए सरकार के उपाय पर असंतोष जताया है। अदालत ने कहा कि हालांकि, सरकार ने टनल के पास गंदगी रोकने के लिए उपाय किए हैं, मगर पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने कोर्ट मित्र के सुझावों पर सरकार से जवाब तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 31 मई को निर्धारित की गई है।
कोर्ट मित्र ने अदालत को सुझाव दिया है कि अटल टलन के पास लोगों की ओर से कूड़ा फेंकने का मुख्य कारण उनका पर्यावरण के प्रति अधूरा ज्ञान, आलस्य, लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है। इसके लिए पर्यावरण कानूनों के अलावा विशेष रूप से स्थानीय कानून जैसे नगर निगम, नगर पालिकाएं, अधिसूचित क्षेत्र समितियां, पंचायती राज संस्थाओं के कानूनों में बदलाव की जरूरत है। साथ ही अटल टनल के पास सीसीटीवी कैमरे लगाने, दक्षिण सिरे पर शौचालय बनाने और टनल के दोनों छोरों को नो वेंडिंग जोन बनाना आदि सुझाव दिए गए।
कोर्ट मित्र ने अदालत को एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि जो भी वाहन टनल से गुजरता है, उसकी तलाशी ली जाए और यदि वाहन में कोई प्लास्टिक बोतल पाई जाती है तो उसमें टैग लगाया जाए। टैग लगाने के बदले 50 रुपये लिए जाए और खाली बोतल देने पर ही वापिस किए जाएं। अदालत ने इन सभी सुझावों पर सरकार को जवाब दायर करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है।