अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी याचिकाकर्ताओं को उनके मूल डीएचएस कैडर में ही कार्य करने दिया जाए और उनकी वर्तमान तैनाती वाले स्थानों पर सेवाएं जारी रखी जाएं। हाईकोर्ट ने यह अंतरिम राहत डॉ. तरुण कुमार और अन्य चिकित्सा अधिकारियों की ओर से दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दी। अदालत ने राज्य सरकार को मामले में तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता डीएचएस कैडर से संबंध रखते हैं।
स्वीकार नहीं की सरकार की दलील
30 मार्च की सरकारी अधिसूचना के अनुसार कॉमन कैडर लागू करने से पहले पात्र चिकित्सा अधिकारियों से डीएचएस या डीएमई कैडर में शामिल होने के लिए लिखित विकल्प लेना आवश्यक था। याचिकाकर्ताओं से ऐसा कोई विकल्प नहीं लिया गया था। ऐसे में उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध डीएमई कैडर में स्थानांतरित करना नियमों के अनुरूप नहीं है। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि 25 सितंबर 2017 की अधिसूचना के तहत सरकार को आपात स्थिति या जनहित में नियमों में छूट देने का अधिकार है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि 2017 की व्यवस्था के तहत भी इच्छुक और पात्र डॉक्टरों से आवेदन आमंत्रित कर पैनल तैयार करने की प्रक्रिया निर्धारित है।