हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही के रिकॉर्ड का उचित रखरखाव न रखने पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वह न्यायिक कार्यवाही करने वाले अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए उचित कदम उठाएं। अदालत ने नाबालिग के अभिभावकता से जुड़े मामले में पाया कि दंडाधिकारी की अदालत में न्यायिक कार्यवाही के रिकॉर्ड का उचित रखरखाव नहीं रखा था। दिन-प्रतिदिन की कार्यवाही को दर्ज नहीं किया गया है और रिकॉर्ड को एक आम आदमी की तरह रखा गया है। अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही करने वाले अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की जरूरत है। अदालत ने मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वह न्यायिक अकादमी में ऐसे अधिकारियों को प्रशिक्षण देने कि लिए उचित कदम उठाएं। नाबालिग के अभिभावकता से जुड़े मामले में दंडाधिकारी की अदालत ने मां को ही नाबालिग का अभिभावक पाया था और नाबालिग को पेश करने के आदेश दिए थे। प्रीति देवी का विवाह जिला सोलन की तहसील रामशहर के बहलम गांव के अमर सिंह के साथ हुआ था।
पति-पत्नी के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों के बीच होने वाले झगड़ों के कारण प्रीति देवी और उसका पति अमर सिंह अपने दो नाबालिग बेटों के साथ नालागढ़ में अलग रह रहे थे। 17 जुलाई 2022 को अमर सिंह ने आत्महत्या कर ली। मृतक अमर सिंह के पिता दर्शन सिंह ने प्रीति देवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने 18 जुलाई 2022 को प्रीति देवी को गिरफ्तार कर लिया और बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। जमानत पर रिहा होने के बाद प्रीति देवी ने अपने बच्चों की कस्टडी के लिए एसडीएम नालागढ़ की अदालत में अर्जी दाखिल की। एसडीएम नालागढ़ ने दादा-दादी को नाबालिग बच्चों की कस्टडी मां प्रीति देवी को सौंपने का निर्देश दिया। डीडीएम नालागढ़ के इस आदेश के खिलाफ दादा-दादी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दलील दी गई कि प्रीति देवी के अपने पति के साथ अच्छे संबंध नहीं थे। ऐसे में मां के हाथों में बच्चों का जीवन सुरक्षित नहीं रहेगा। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि हालांकि, बच्चों की अभिरक्षा (कस्टडी) पर मां का पूरा अधिकार नहीं है। बच्चों का कल्याण उसकी अभिभावकता को तय करता है। यदि मां बच्चे के कल्याण के लिए अक्षम या अयोग्य है तो वह अभिभावक का हक खो देगी और बच्चे के कल्याण करने वाला ही उसका अभिभावक होगा। इसके लिए मां को उचित कार्यवाही में बच्चे के कल्याण के लिए अयोग्य घोषित किया जाना जरूरी है।