हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जंगी-थोपन मामले की सुनवाई 12 जनवरी को निर्धारित की गई है। अदालत ने अदाणी समूह और राज्य सरकार की दोनों अपीलों की सुनवाई एक साथ निर्धारित की है। किन्नौर जिले की जंगी-थोपन-पोवारी जल विद्युत परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है। विदेशी कंपनी ब्रेकल के बाद अदाणी समूह भी इस परियोजना को नहीं बनाना चाहता है। 960 मेगावाट के महत्वपूर्ण हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को ब्रेकल को वर्ष 2007 में आवंटित किया गया। कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया और अपफ्रंट राशि जमा नहीं करवाई।
इसके बाद यह प्रोजेक्ट अदाणी कंपनी को दिया गया। समूह ने प्रीमियम के तौर पर 280.06 करोड़ रुपये जमा किए। बाद में इस परियोजना के टेंडर को रद्द कर दिया गया। ब्रेकल कंपनी ने हिमाचल सरकार से पत्राचार किया और अगस्त 2013 को अदाणी समूह के पार्टनर के तौर पर 280.06 करोड़ रुपये ब्याज सहित वापस करने के लिए आग्रह किया। अक्तूबर 2017 में कैबिनेट मीटिंग में वीरभद्र सिंह सरकार ने फैसला लिया था कि अदाणी समूह को पावर प्रोजेक्ट की 280 करोड़ रुपये की अपफ्रंट मनी वापस की जाएगी, लेकिन 5 दिसंबर, 2017 को सरकार ने यह फैसला वापस ले लिया।
चंबा जिला के भलेई कॉलेज का भवन न बनवाने के मामले में राज्य सरकार ने जवाब दायर नहीं किया है। इसके लिए मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने अतिरिक्त समय दिया है। अदालत ने मुख्य सचिव और प्रधान सचिव शिक्षा से तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद निर्धारित की गई है। अदालत ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर के आधार पर जनहित में याचिका दायर की है। चंबा जिले के भलेई कॉलेज का अपना भवन न होने की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। वर्ष 2021 तक प्राइमरी स्कूल भवन में पढ़ाई चलती रही।
प्राइमरी स्कूल की इमारत जर्जर होने के बाद स्थानीय पंचायत से एक साल के लिए दो कमरे किराये पर लिए गए। बारिश के कारण कमरे भी खस्ताहाल हो गए हैं। जहां विद्यार्थियों को बैठाना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। कॉलेज का सामान भी इन खस्ताहाल कमरों में रखा गया है। हालांकि, इस बारे में प्रशासन को कई बार अवगत करवाया जा चुका है। अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि नजदीक में ही एक पर्यटन विभाग का भवन है। पांच साल बीत जाने के बावजूद भी कॉलेज का अपना भवन नहीं है।