प्रदेश हाईकोर्ट ने चरस में कथित आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कुल्लू निवासी दाबे राम ने अदालत से अंतरिम जमानत पर रिहा किए जाने की गुहार लगाई थी। 1.2 किलोग्राम चरस कारोबार में संलिप्त पाए जाने पर सोलन पुलिस ने दाबे राम को चरस के मामले में नामित किया है। आरोपी के खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 20 और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है। 13 फरवरी 2022 को सोलन पुलिस ने सुबाथू रोड पर नाका लगाया था।
शाम के समय पुलिस ने आरोपी गोविंद राम को 1.2 किलोग्राम चरस के साथ पकड़ा था। जांच के दौरान गोविंद राम ने पुलिस को बताया कि उसने यह चरस कुल्लू निवासी दाबे राम से खरीदी है। पुलिस ने उसके घर जाकर पूछताछ की और पाया कि आरोपी दाबे राम घर से 10 किलोमीटर दूर मणिकर्ण की तरफ छिपा था। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि आरोपी 1.2 किलोग्राम चरस कारोबार में संलिप्त पाया गया है। इसे जमानत पर रिहा किया जाना उचित नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता अंतरिम जमानत पर रिहा होने का हक नहीं रखता है।
सोलन जिला में निर्धारित मापदंडों के विरुद्ध बिरोजा निकालने के मामले में वन निगम की ओर से जवाब दायर नहीं किया गया। अदालत ने निगम को इसके लिए अतिरिक्त समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 4 मार्च 2023 को निर्धारित की है।जनहित में दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने राज्य सरकार और वन निगम से दो हफ्ते के भीतर जवाब तलब किया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोलन वन वृत्त में वन निगम के निर्धारित मापदंडों के विपरीत बिरोजा दोहन किया जा रहा है। दलील दी गई कि वर्ष 1975-76 में बिरोजा निकालने का काम वन निगम को दिया गया था। वर्ष 2020 में वन निगम ने नियम बनाया कि एक वन सेक्शन से 55 क्विंटल बिरोजा निकाला जाएगा।
याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि वह 17 अगस्त 2022 को अपने बगीचे को जा रहा था तो रास्ते में उसने बिरोजा निकालने वाले मजदूर देखे। उनसे बातचीत पर पता चला कि इस बार निगम अधिक मात्रा में बिरोजा निकाल रहा है। मजदूरों ने याचिकाकर्ता को बताया कि इस बारे में वन निगम के निदेशक ने वन अरण्यपाल सोलन से पत्राचार किया है। अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने इस बारे में सूचना के अधिकार के तहत सूचना प्राप्त की। सूचना के अनुसार निगम ने वर्ष 2020 में एक वन सेक्शन से 55 क्विंटल बिरोजा निकालने का निर्णय लिया था। जबकि इसके लिए बनाए गए नियमों के अनुसार एक वन सेक्शन से सिर्फ 35 क्विंटल बिरोजा ही निकाला जा सकता है। आरोप लगाया गया है कि बिरोजा के अधिक दोहन से पेड़ सूखने की कागार पर है जिससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुमारहट्टी के समीप मल्टी स्टोरी निर्माण मामले की सुनवाई 4 जनवरी निर्धारित की है। अदालत ने आठ मंजिल और 2500 वर्ग मीटर से अधिक निर्माण पर रोक लगा रखी है। खील-झलाशी गांव से कैंथरी गांव तक 6 किलोमीटर में सड़क के दोनों तरफ भवन निर्माण को याचिकाकर्ता कुसुम बाली ने चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि खील-झलाशी गांव से कैंथरी गांव तक बड़े -बड़े भवनों का निर्माण किया गया है।
इसके लिए पहाड़ी को काटा गया है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि जान-माल का खतरा भी बना रहता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने 10 सदस्यीय हाई पावर कमेटी का गठन किया है। प्रधान सचिव टीसीपी को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। मुख्य अरण्यपाल, राजस्व सचिव, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, पर्यटन विभाग, टीसीपी के निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता को इसका सदस्य बनाया गया है।