हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वाटर शेड में कार्यरत जेई की सेवाओं को नियमित करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को 8 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने की तिथि से नियमित किया जाए। अदालत ने याचिकाकर्ता को सभी सेवा लाभ का हकदार ठहराया है। याचिकाकर्ता को 8 मार्च 2001 को जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ने जेई के पद पर बतौर दैनिक वेतन भोगी नियुक्त किया था। शुरू में याचिकाकर्ता को एक वर्ष के अनुबंध आधार पर रखा गया था और बाद में अनुबंध का वर्ष दर वर्ष नवीनीकरण किया गया।
दैनिक वेतन भोगी रहते 8 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार से अपनी सेवाओं को नियमित करने की गुहार लगाई। राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता के आवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया था कि उसे राज्य सरकार की ओर से मंजूरशुदा पद पर नियुक्त नहीं किया गया है। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ने याचिकाकर्ता की तरह कार्यरत कई लोगों की सेवाओं को 8 वर्ष के कार्यकाल पूरा होने पर नियमित किया है। याचिकाकर्ता के मामले में विभाग यह दलील नहीं दे सकता कि उसकी नियुक्ति मंजूरशुदा पद पर नहीं हुई है। अदालत ने याचिका को स्वीकारते हुए यह निर्णय सुनाया।
चिट्टा रखने की आरोपी को जमानत
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चिट्टा रखने के आरोपी को एक लाख रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने कांगड़ा निवासी काजल की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम में नामित आरोपी डेढ़ साल से पुलिस हिरासत में है। पुलिस ने आरोपी से 12.73 ग्राम चिट्टा और 1.84 लाख रुपये की नकदी पकड़ी थी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इस मामले में पुलिस ने 23 सितंबर 2018 को अदालत के समक्ष चालान दायर कर दिया है, लेकिन अभी तक इस मामले में आरोप तय नहीं किए गए हैं। याचिकाकर्ता विधवा है और उसके बच्चों की देखभाल के लिए कोई नहीं है। अदालत ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश देते हुए शर्त लगाई है कि आरोपी समय-समय पर अदालत के समक्ष पेश होगी। वह अभियोजन पक्ष की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। देश से बाहर जाने के लिए उसे अदालत की अनुमति लेनी होगी। ब्यूरो