प्रदेश हाईकोर्ट में वन भूमि पर अवैध ढंग से सेब के बगीचे विकसित करने के मामले पर सुनवाई 22 मई के लिए टल गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने उन कब्जाधारियों को 5 बीघा से अधिक कब्जाई भूमि को स्वत: छोड़ने बाबत शपथ पत्र देने का अतिरिक्त समय देते हुए यह आदेश दिए जो हाईकोर्ट के पिछले आदेशनुसार ऐसा नहीं कर सके हैं।
हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह 28 फरवरी 2017 तक वन भूमि से सभी अवैध कब्जों को हटाए। उल्लेखनीय है कि कृष्ण चंद सारटा ने साल 2014 में मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र लिख कर बताया था कि लोगों ने जंगलों को काटकर घर, खेत और बगीचे बना लिए हैं। वन विभाग की मिलीभगत से इन्हें बिजली-पानी के कनेक्शन भी मुहैया करवा दिए गए हैं।
कोर्ट ने पत्र पर संज्ञान लिया और वन विभाग को समय समय पर जारी आदेशानुसार अवैध बगीचों को काट कर वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करवाने के आदेश दिए थे। वन विभाग ने कोर्ट के आदेशानुसार वन भूमि से सेब के पेड़ों को काटने का अभियान छेड़ा लेकिन, कुछ कब्जाधारियों ने विभिन्न अदालतों में मामले दायर कर इस मुहिम को लंबा लटकाने की कोशिश की।
हाईकोर्ट ने ऐसे मामले देख रहे न्यायालयों को तय समय सीमा के भीतर वन भूमि पर अवैध कब्जों से जुड़े मामलों को निपटाने के आदेश दिए थे। कई बार कोर्ट ने वन विभाग को आदेश दिए कि वह तय सीमा के भीतर वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करवाए।