कोर्ट ने इससे पहले संबंधित विभागों से पूछा था कि शिमला कालका राष्ट्रीय उच्च मार्ग के दोनों तरफ निर्माण करने की इजाजत किस-किस को दे रखी है। कोर्ट ने विशेषकर बड़ोग बाईपास और उसके नजदीक सड़क मार्ग की पूरी जानकारी मांगी थी।
कहा था कि सड़क मार्ग के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण होते चले गए और हाईकोर्ट की ओर से संज्ञान लेने के बाद भी ये कर्मचारी सोते रहे। कोर्ट ने कहा था कि क्यों न इनके खिलाफ अवमानना के साथ भ्रष्टाचार के मामले चलाए जाएं।
कोर्ट के इन आदेशों के बावजूद न तो किसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई और न ही अधिकारियों, कर्मचारियों के नाम कोर्ट के सामने लाए गए। मामले पर अब 17 मई को सुनवाई होगी।