उल्लेखनीय है कि उपरोक्त अधिनियम के तहत निजी लोगों व व्यवसायियों को कुछ शर्तों के साथ बोरवेल से पानी निकालने की परमिशन दी जाती है। इसमें एक पानी का कनेक्शन स्थानीय गांव को देना भी शामिल है।
कसौली तहसील में पड़ने वाले गांव सनावड़ के कुछ बाशिंदों ने उनके क्षेत्र में स्थित बोरवेल से वांछित पानी न मिलने पर बोरवेल परमिट मालिक के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। प्रार्थियों का आरोप है कि मैसर्स शुभम प्रोपमार्ट लिमिटेड ने जो बोरवेल की परमिशन ली है, वह गैरकानूनी है।
उन्हें इस बोरवेल से कोई पानी नहीं मिल पा रहा है। कसौली गड़खल की ग्राम सभा ने उपरोक्त बोरवेल परमिट को रद्द करने का प्रस्ताव भी पारित किया था। मामले के लंबित रहते कोर्ट के आदेशानुसार मुख्य सचिव ने उक्त बोरवेल परमिट होल्डर द्वारा नियमों की अनदेखी पाते हुए परमिट को रद्द कर दिया था।