ख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह जांच में सही पाई गई डिग्रियों की सूची अदालत के समक्ष दायर करे। अदालत ने मामले की सुनवाई 16 अगस्त को निर्धारित की गई है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मानव भारती विश्वविद्यालय के खिलाफ दायर किए गए चालान को पेश करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह जांच में सही पाई गई डिग्रियों की सूची अदालत के समक्ष दायर करे। अदालत ने मामले की सुनवाई 16 अगस्त को निर्धारित की गई है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि फर्जी डिग्री आपराधिक मामले में विचारण न्यायालय के समक्ष चालान दायर कर दिया गया है।
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एमबीयू के लगभग 250 छात्रों ने अदालत को पत्र लिख कर अपनी वास्तविक डिग्रियां दिलवाने की गुहार लगाई है। अदालत को बताया गया है कि डिग्रियां न मिलने के कारण उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दाखिला भी नहीं मिल पा रहा है। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग ने मानव भारती विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्रियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच और उनका सत्यापन करने के लिए कमेटी गठित करने का आदेश दिया था।
छात्रों का कहना था कि डिग्रियों का सत्यापन न होने से उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। विश्वविद्यालय पर फर्जी डिग्रियां बांटने का आरोप है। विशेष जांच टीम मामले की पहले से ही पड़ताल कर रही है। जांच कमेटी गठित होने के बाद सैकड़ों छात्रों ने अपने प्रमाणपत्रों को जांचने के लिए आवेदन किए हैं। मानव भारती की ओर से प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल किए गए जवाब में भी यह आग्रह किया गया है कि पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि वह इस मामले से संबंधित जांच को जल्द से जल्द पूरा करे।