राज्य सरकार की नीति और 7 साल/9600 घंटे की सेवा पूरी करने के बाद 22 दिसंबर 2017 से उनकी सेवाओं को अनुबंध आधार पर लिया गया। 3 साल की निरंतर अनुबंध सेवा पूरी करने के बाद 28 अप्रैल 2021 को याचिकाकर्ता की सेवाओं को नियमित कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि 22 दिसंबर 2017 से लेकर 28 अप्रैल 2021 (नियमितीकरण की तिथि) तक दी गई अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और पदोन्नति के लाभों के लिए जोड़ा जाए।
याचिकाकर्ता ने ताज मोहम्मद बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में दिए गए फैसले के आधार पर वरिष्ठता का दावा किया था। राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ताज मोहम्मद मामले में राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी खारिज हो चुकी है और वह निर्णय अब अंतिम रूप ले चुका है। इसलिए उस फैसले का लाभ याचिकाकर्ता को देने में एकल पीठ से कोई त्रुटि नहीं हुई है।