स्कूल-कॉलेजों के नजदीक दुकानों, कैंटीनों, ढाबों और रेस्टोरेंट की समय-समय पर जांच करने के आदेश जारी किए हैं। ऐसे पदार्थों को केमिस्ट और मेडिकल प्रैक्टिशनर कोे बेचे जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी बात की।
उच्च न्यायालय ने यह भी सुझाव दिया है कि विशेष जांच दल को गठित करें। अभियोजन विभाग को यह यह निर्देश देने का को कहा कि उनकी ओर से न्यायालय में पेश होने वाले अधिकारी ऐसे मामलों में जमानत याचिका का विरोध करें।
चाहे पकड़ा गया मादक पदार्थ थोड़ी मात्रा में ही क्यों न हो। न्यायालय ने कहा कि यह समस्या बड़ी जटिल है मगर इसकी रोकथाम असंभव नहीं, अगर इस पर रोकथाम लगाने के लिए प्रयास किए जाएं।
न्यायालय ने इन आदेशों की बाबत प्रदेश के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को जानकारी देने को कहा है, जिससे इस संबंध में जल्दी से जल्दी कदम उठाए जा सके।
उच्च न्यायालय ने मादक पदार्थों को औषधियों के लिए उपयोग में लाने के लिए रिसर्च एजेंसी की सेवाएं लेने का सुझाव दिया है, स्थानीय निवासी जो अवैध तरीके से मादक पदार्थों के व्यवसाय से जुड़े हैं वे अपने मादक पदार्थों जैसे भांग आदि के पौधों को औषधियां बनाने जैसे व्यवसाय के लिए देने के लिए प्राथमिकता देंगे।
उच्च न्यायालय ने चिंता जताई कि राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी का धंधा जोरों पर है। नए-नए पदार्थ मार्केट में आ रहे हैं। पुलिस के शपथपत्र का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि अप्रैल, मई और जून 2018 में भारी मात्रा में मादक पदार्थों को प्रदेश की पुलिस की ओर से पकड़ा गया है।
उच्च न्यायालय ने यह कहा कि इन पदार्थों की तस्करी के लिए गरीब बच्चों को मैसेंजर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से इस बात का लाभ नहीं लिया जा सकता कि तस्करों को पकड़ने के लिए उनके पास साधनों की कमी है।