हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मिनी इजरायल के नाम से प्रसिद्घ कसोल में बिना मंजूरी संचालित किए जा रहे होटलों को लेकर बड़ा आदेश पारित किया है। इस आदेश से ऐसे होटल मालिकों की मुश्किलें बढ़ गई है।
हिमाचल हाईकोर्ट ने उपायुक्त कुल्लू को आदेश दिए हैं कि कसोल में बिना मंजूरी खुले 44 होटलों को तुरंत प्रभाव से बंद करवाएं। न्यायालय ने पाया कि यह होटल वन भूमि पर अतिक्रमण करके बनाए गए हैं। इनके बिजली व पानी के कनेक्शन काट दिए जाएं।
अगर जरूरत पड़ी तो इसके लिए पुलिस अधीक्षक कुल्लू की मदद ली जाए। उच्च न्यायालय ने कसोल में हुए अवैध निर्माण को भी तुरंत प्रभाव से हटाने के आदेश दिए हैं।
पर्यटन विभाग ने इन होटलों को नहीं दी मंजूरी
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कसोल गांव में कानून के विपरीत कार्य कर रहे किसी भी संस्थान को चलाने की अनुमति प्रदान न करने के आदेश दिए। मामले पर सुनवाई अब 11 जनवरी को होगी।
न्यायालय ने ज्वाइंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट के अवलोकन के दौरान पाया कि कसोल गांव में 60 में से 44 होटलों को पर्यटन विभाग की ओर से कोई भी अनुमति नहीं मिली है। जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974, वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1980 के अंतर्गत सक्षम विभाग से भी इन होटलों ने अनुमति नहीं ले रखी है।
नशे पर डीजीपी और एनसीबी से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक और जोनल निदेशक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो चंडीगढ़ को आदेश दिए हैं कि वह नशाखोरों के खिलाफ धरपकड़ की प्रक्रिया को जारी रखते हुए ताजा स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष दाखिल करे।
कोर्ट ने कहा कि नशाखोरी की समस्या समाज में विकाल रूप धारण कर चुकी है। आए दिन काफी मात्रा में प्रदेश से बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ सामग्री पकड़ी जा रही है।
प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक कुल्लू और क्षेत्रीय निदेशक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो चंडीगढ़ को गत 25 अक्तूबर को आदेश दिए थे कि वह ज्वाइंट टास्क फोर्स का गठन कर कसोल गांव के सभी रेस्टोरेंट्स, होटलों और ढाबों की तलाशी लें। वहां हो रही गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाए।
मलाणा गांव के निरीक्षण के दिए थे आदेश
हाईकोर्ट ने ज्वाइंट टास्क फोर्स को आदेश दिए गए थे कि वह कुल्लू के मलाणा गांव का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि उस क्षेत्र में पूरी तरीके से नशीले पदार्थों को उगाने और उनका व्यापार करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाए। बता दें कि मलाणा कुल्लू घाटी में चरस के लिए बदनाम गांवों में से एक है।