शिमला नगर निगम के चुनाव से जुड़ी वोटर लिस्ट में संशोधन को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के आदेशों पर हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयुक्त और शहरी विकास विभाग के सचिव से 26 मई तक जवाब तलब किया है। आयोग ने 9 मई को आदेश जारी किए थे कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की शिकायतों के चलते 23 जून को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।
इस आदेश के बाद साफ होे गया था कि जून के पहले हफ्ते से पहले न तो चुनाव हो सकते हैं और न ही नई कार्यकारिणी गठित हो सकती है। आयोग के इसी फैसले के खिलाफ शिमला निवासी राजू ठाकुर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। दायर याचिका में प्रार्थी राजू ठाकुर का कहना था कि चुनाव आयोग ने नगर निगम शिमला के चुनाव टालने के इरादे से यह अधिसूचना जारी की है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य निर्वाचन आयोग और शहरी विकास विभाग के सचिव से 26 मई तक जवाब तलब किया है।
9 मई को आयोग ने मतदाता सूचियों में विशेष पुनरीक्षण के निर्देश जारी किए थे। आयोग की ओर से कहा गया था कि राजनीतिक दलों, नगर निगम के महापौर और पार्षदों तथा लोगों की ओर से मतदाता सूचियों पर उठाए गए सवालों के चलते निष्पक्ष और सुचारु चुनाव सुनिश्चित बनाने के लिए मतदाता सूचियों को दुरुस्त करना जरूरी है।
आयोग के प्रवक्ता ने बताया था कि राज्य चुनाव आयोग के निर्देशानुसार चुनाव पंजीकरण अधिकारी एवं उपायुक्त शिमला ने 5 मई को नगर निगम शिमला की मतदाता सूचियां तैयार करके इन्हें अधिसूचित किया था। जिसमें मतदाताओं की कुल संख्या 88,167 दर्शाई गई। जबकि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 5 मई को सूचित किया था कि नगर निगम क्षेत्र के लिए कुल 85,546 मतदाताओं को पंजीकृत किया गया है।
उन्होंने कहा कि दोनों मतदाता सूचियां पहली जनवरी 2017 एक ही अर्हता तिथि के संदर्भ में तैयारी की गई हैं। हालांकि 2200 आवेदन अभी भी पुनरीक्षण अधिकारियों के पास लंबित हैं। ऐसे में 23 जून को अंतिम सूची जारी की जाएगी। आयोग के इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।