हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आत्महत्या से जुडे़ एक मामले में डॉक्टर राजेंद्र कोहली और पीएसआई अशोक कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ फौजदारी कानून के तहत मामला दर्ज किया जाए और विभागीय कार्रवाई क्यों न अमल में लाई जाए।
न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी और सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार की ओर से दायर अपील की सुनवाई के दौरान ये आदेश पारित किए। मामले के अनुसार कुल्लू जिले की दिवंगत चिंतामणि ने 7 मार्च 2012 को सुबह 7:45 पर नशीला पदार्थ खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी।
चिंतामणि को 9:30 पर कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में दाखिल किया था। डॉक्टर राजेंद्र कोहली क्षेत्रीय अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात था, मगर पुलिस को 12:45 तक इस मामले की कोई भी सूचना नहीं दी गई। जब तक पुलिस अस्पताल में मौके पर पहुंची, तब तक चिंतामणि की मृत्यु हो चुकी थी।
कोर्ट ने डॉक्टर राजेंद्र को ड्यूटी के दौरान कोताही बरतने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उसे 2 मार्च को 2017 को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के भी आदेश दिए हैं और कोर्ट ने पाया कि इस मामले में जांच अधिकारी पीएसआई अशोक कुमार ने भी निष्पक्ष रूप से जांच नहीं की, इसलिए उसे भी 2 मार्च 2013 को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है।