इस कमेटी में 11 अन्य सदस्य शामिल होंगे, जिनमें से 9 पुलिस विभाग के विशेषज्ञ होंगे। यह कमेटी कांस्टेबलों को हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नत करने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। अदालत ने टिप्पणी की कि वर्तमान में कांस्टेबलों के लिए पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं। विशेष रूप से जनरल ड्यूटी देने वाले कांस्टेबलों के पास अन्य उप-कैडर की तुलना में पदोन्नति के रास्ते कम हैं। न्यायालय ने इस तथ्य पर गौर किया कि 20 साल की सेवा के बाद कांस्टेबलों को मानद हेड कांस्टेबल का पद तो दे दिया जाता है, लेकिन उन्हें काम कांस्टेबल का ही करना पड़ता है।
इसके बदले उन्हें 80 से 200 रुपये का मामूली वित्तीय लाभ मिलता है, जिसे अदालत ने अपर्याप्त माना। पुलिस कर्मियों को समयबद्ध पदोन्नति, उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन, ओवरटाइम भत्ता, साप्ताहिक अवकाश और आवासीय सुविधा जैसे लाभ मिलने चाहिए।