हाईकोर्ट ने शिमला शहर में बंदरों को वर्मिन घोषित करने वाली अधिसूचना पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला शहर में बंदरों को वर्मिन घोषित करने वाली अधिसूचना पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की इस अधिसूचना को निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किए।
याचिकाकर्ता ने अधिसूचना पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। मामले पर आगामी सुनवाई तीन मई को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला सहित केंद्र और राज्य सरकार से इस संदर्भ में दो सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
याचिकाकर्ता राजेश्वर सिंह नेगी ने केंद्र सरकार की 14 मार्च 2016 को जारी उस अधिसूचना को अवैध ठहराने की गुहार लगाई है जिसके तहत शिमला शहर में जंगलों को छोड़ कर अन्य स्थानों पर पाए जाने वाले बंदरों को छह माह के लिए वर्मिन घोषित कर दिया है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक इस घोषणा के चलते बंदरों को रिहायशी क्षेत्रों में बिना किसी अनुमति के मारा जा सकेगा। बंदरों को मारना कोई अपराध नहीं होगा। प्रार्थी का कहना है कि बंदरों को कीड़े-मकोड़े की तरह समझना मूर्खतापूर्ण निर्णय है।
विश्व में बंदरों की बौद्धिकता और सामाजिक व्यवहार पर रिसर्च की जा रही है। प्रार्थी का तर्क है कि इस अधिसूचना को जारी करने के लिए जो उद्देश्य बताए जा रहे हैं वह वास्तविकता से कोसों दूर हैं। प्रार्थी की मांग है कि बंदरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया जाए।