राज्य सरकार के सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों को राहत देने के लिए बनाए गए प्रारूप नियमों के प्रकाशन की इजाजत मांगने को हाईकोर्ट में दायर आवेदन पर मंगलवार को सुनवाई होगी।
सात मार्च को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने सरकार के इस आवेदन पर संबंधित पक्षकारों को एक सप्ताह में आपत्तियां दर्ज करने के आदेश दिए थे।
सरकार ने इस आवेदन के माध्यम से कोर्ट को बताया है कि वह विधानसभा के संकल्प स्वरूप सरकारी, वन भूमि पर 5 बीघा भूमि तक अतिक्रमण को मानवीय आधार पर मालिकाना हक में तबदील करना चाहती है।
सरकार ने इस आवेदन के साथ भू-राजस्व अधिनियम के तहत बनाए गए उन प्रारूप नियमों की प्रति भी पेश की, जिसके तहत अतिक्रमणकारियों को राहत देने के नियम बनाए गए हैं।