राजधानी शिमला में पीलिया फैलने के मामले में पुलिस पर्यावरण इंजीनियरों को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। हाईकोर्ट ने दोनों अफसरों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने पीलिया मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में कार्यरत पर्यावरण इंजीनियर एसके शांडिल और जूनियर पर्यावरण इंजीनियर अभय गुप्ता को राहत दी है।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने प्रार्थियों की दलीलों से सहमति जताते हुए यह आदेश पारित किए। दोनों अधिकारियों को जांच में सहयोग करने के आदेश भी दिए हैं। पीलिया मामले की जांच को गठित एसआईटी ने आईपीएच तथा एसटीपी के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था।
न्यायाधीश राजीव शर्मा ने एक गिरफ्तार कर्मी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए सख्त शब्दों में एसआईटी को फटकारते हुए कहा था कि सरकार केवल छोटे लोगों पर कार्यवाही कर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। छोटे लोगों को केवल बलि का बकरा बनाया जा रहा है। बड़े अधिकारियों की लापरवाही से लोग पीलिया जैसी बीमारी से ग्रसित हुए।
हजारों लोगों को गहरा शारीरिक आघात लगा। कोर्ट ने खेद प्रकट किया था कि एसआईटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम सहित आईपीएच के बड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई जांच नहीं की। कोर्ट की इसी टिप्पणी के बाद प्रार्थियों को अपनी गिरफ्तारी का डर सताने लगा था। उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर की थीं।