मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर राज्य कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं है तो उसे आम जनता को कुछ अलग राहत प्रदान करने के लिए योजना बनानी चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधान केवल एक निवारक हैं और ये आम नागरिक को संपत्ति के नुकसान के लिए मुआवजा दिलाने में मदद नहीं करते। जनहित याचिका में प्रदर्शनकारियों द्वारा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर मुआवजे को लेकर नियम बनाने की मांग की गई है। वहीं राज्य सरकार ने क्षतिपूर्ति के लिए सीपीसी के तहत अदालत में मुकदमा दाखिल करने की राय दी। कोर्ट ने इस कानूनी राय को अस्वीकार किया है और कहा कि प्रदर्शनकारियों से वसूली असंभव है।