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अवैध कब्जा मामलाः पेड़ कटान पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इनकार

Thu, 31 May 2018 08:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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फाइल फोटो
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प्रदेश हाईकोर्ट से वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लगाए फलदार पौधों को न काटने की गुहार पर कोई राहत नहीं मिली है। आवेदनकर्ताओं ने कोर्ट से पर्यावरण की दुहाई देते हुए हरे भरे पेड़ों को न काटने की गुहार लगाई थी।

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कोर्ट ने जब अवैध कब्जाधरियों से पूछा कि क्या उन्होंने खुद वन विभाग के पास जाकर यह बताया कि उन्होंने जिस वन भूमि पर कब्जा किया है वो उसे स्वेच्छा से छोड़ना चाहते हैं।

इस प्रश्न का संतोषजनक उत्तर न मिलने पर कोर्ट ने कहा कि जब कोई भी कब्जाधारी स्वयं अपनी ईमानदारी दिखाने को आगे नहीं आया तो इन अवैध कब्जों को हटाने का एकमात्र उपाय इनकी हैवी प्रूनिंग ही रह जाता है। 

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पौधों की ग्राफ्टिंग शुरू कर दी

फाइल फोटो
कोर्ट के संज्ञान में यह बात भी आई कि जिन कब्जों को छुड़ा लिया गया था, वहां पर दोबारा लोगों ने जल्दी से बढ़ने वाले पौधों की ग्राफ्टिंग शुरू कर दी है। दोबारा वन भूमि पर काबिज होने लगे हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने इन नए तथ्यों के मद्देनजर पेड़ों के कटान पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सरकार सहित अवैध कब्जाधारी कोर्ट को यह बताने में नाकाम रहे कि पेड़ों को न काटने की सूरत में किस तरह वन भूमि को अवैध कब्जाधारियों से छुड़ाया जा सकता है। 
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आदेशों की अनुपालना संबंधी ताजा स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश

वन विभाग के पास इतने साधन नहीं हैं कि वह हर प्रकार के छोटे बड़े कब्जों की चौकीदारी करता रहे। लोग स्वयं ईमानदारी से पेश नहीं आ रहे जिस कारण वन भूमि को अवैध कब्जों से छुड़ाना एक चुनौती बन गया है।

सरकार की लाचारी के कारण ही हाईकोर्ट को मात्र 13 परिवारों से वन भूमि को छुड़ाने के लिए एसआइटी का गठन करना पड़ा। तब जाकर अवैध कब्जों को छुड़ाया जा सका।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद वन विभाग को अपने पिछले आदेशों की अनुपालना संबंधी ताजा स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए। मामले पर सुनवाई 20 जून को होगी।
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