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सौ से ज्यादा स्वास्थ्य संस्थानों की होगी समीक्षा, स्वास्थ्य मंत्री ने बताई ये वजह

Wed, 07 Mar 2018 09:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने हिमाचल में आचार संहिता से छह महीने पहले मानकों को दरकिनार कर कई संस्थान खोल दिए और कई अपग्रेड कर दिए। 
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सरकार ऐसे 103 स्वास्थ्य संस्थानों की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में एक चिकित्सा संस्थान खोला गया है लेकिन वह फाइल में ढूंढकर भी नहीं मिल रहा है। परमार बड़सर विधानसभा क्षेत्र के विधायक इंद्र दत्त लखनपाल के प्रश्न का जवाब दे रहे थे। 

मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र खोलने से पहले गांव की जनसंख्या देखी जाती है। स्टाफ की तैनाती के लिए कैबिनेट से मंजूरी ली जाती है लेकिन यह सब नहीं किया गया। वित्त विभाग से भी मंजूरी नहीं ली गई। 
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कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पूछा ये सवाल

कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अनुपूरक प्रश्न में पूछा कि क्या सरकार इन संस्थानों को बंद करना चाहती है। जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार फिलहाल इन संस्थानों की समीक्षा करेगी।

विधायक राकेश कालिया ने अपने विधानसभा क्षेत्र का मामला उठाते हुए कहा कि उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास किया था, उस पट्टिका पर बीएमओ की प्लेट चढ़ा दी।

जहां पीएचसी खोलने के लिए स्थान चयनित था, वहां दवा की दुकान खोली गई। मंत्री ने इस मामले पर विभाग को जांच करने के निर्देश दिए। विधायक रामलाल ने भी इस मामले में अनुरूपक प्रश्न किए। 

कहीं जरूरत से ज्यादा स्टाफ तो कहीं कमी

स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि हिमाचल के कई स्वास्थ्य संस्थानों में जरूरत से ज्यादा स्टाफ है जबकि कई संस्थान ऐसे हैं जहां स्टाफ नहीं है। यह अव्यवस्था दो महीने में नहीं बल्कि बीते पांच सालों में हुई है।

परमार ने यह जानकारी विधायक बिक्रम सिंह के प्रश्न के उत्तर में दी। कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने सरकार के समक्ष एक चिकित्सा संस्थान में स्वीकृति पद से ज्यादा डेपुटेशन पर बैठे स्टाफ को वापस भेजने का मामला उठाया।

जवाब में परमार ने कहा कि सरकार इस व्यवस्था को ठीक करेगी। हिमाचल में डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा रहा है। प्रदेश सरकार 200 डॉक्टरों की भर्ती करेगी। कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। 

मंडी के भांबला में विकसित होगा औद्योगिक क्षेत्र

उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि मंडी के भांबला में औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा। पहले भी इस क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लोगों ने जमीनें दी हैं।

अगर लोग जमीन देने को तैयार हो जाते हैं तो उद्योगों का विस्तार बढ़ सकता है। उन्होंने उद्योग विभाग के निदेशक को इस संबंध में जगह का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए। मंत्री ने यह जानकारी विधायक इंद्र सिंह के प्रश्न के उत्तर में दी। 

एक ही जगह खर्च दिया पेयजल का पूरा पैसा : महेंद्र

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि पेयजल योजनाओं के लिए भारत सरकार से जो भी पैसा आता है, वह पूरे प्रदेश के लिए होता है। उस राशि में से 20 से 22 करोड़ रुपये सिर्फ एक ही विधानसभा क्षेत्र में खर्च किया जा रहा है।

यह पैसा इतना ज्यादा नहीं होता है। केंद्र से हिमाचल को पूरे साल के लिए लगभग 65 से 66 करोड़ रुपये मिलते हैं। यह बात हमारी समझ से बाहर है कि 65 से 66 करोड़ रुपये पूरे प्रदेश में खर्च होने चाहिए थे, जो नहीं हुए।

महेंद्र सिहं ने यह बात रोहडू़ के कांग्रेस विधायक मोहन लाल ब्राक्टा के सवाल के जवाब में कही। मंत्री ने कहा कि रोहडू़ के विधायक ने जिन 19 स्कीमों की बात कही है, वह उठाऊ पेयजल से संबंधित हैं और यह राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत वित्त पोषित होती हैं।

इससे पहले ब्राक्टा ने सवाल किया था कि उनके क्षेत्र की 19 उठाऊ पेयजल योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। उन्होंने पब्बर नदी के तटीकरण का मामला भी उठाया और कहा कि 190 करोड़ रुपये इसके लिए 25 मई 2015 को मंजूर हुए थे।

लेकिन बजट के अभाव के कारण इनका काम रुका है। यह केंद्र की योजना है। ऐसे में सवाल यह है कि यह पैसा जानबूझकर केंद्र सरकार ने रोक रखा है। इसके जवाब में मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसी कई योजनाएं केंद्र सरकार के पास लंबित हैं। 

आईपीएच विभाग में लगा दो ताला : नेगी 

किन्नौर के विधायक जगत सिंह ने विधानसभा में बासपा के तटीकरण के लिए डीपीआर बनाने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि नदी में बाढ़ से आसपास के गांवों को खतरा हो जाता है।

पहले भी नदी में बाढ़ की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में खड्डों और नदी का तटीकरण जरूरी है। जवाब में आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि डीपीआर नहीं बनेगी तो पैसा कहां से आएगा।

इस पर विधायक जगत सिंह नेगी बोले - आईपीएच विभाग में ताला लगा देना चाहिए। सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने भी अनुपूरक प्रश्न में नदी का तटीकरण प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि जब जेपी कंपनी के साथ सरकार का एमओयू हुआ था, उसमें भी बसपा नदी के कैचमेंट एरिया और पूरे तट को मजबूत करने की शर्तें थीं। लेकिन जेपी ने अब इस प्रोजेक्ट को दूसरी कंपनी को बेच दिया है।

क्या यह कंपनी शर्तें पूरी करेगी? इस पर महेंद्र सिंह ने कहा कि यह मामला मेरे विभाग से संबंधित नहीं है। उन्होंने यह मामला ऊर्जा मंत्री को सौंपने की बात कही।

वृद्धा पेंशन योजना का होगा सरलीकरण

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री राजीव सैजल ने कहा कि हिमाचल में वृद्धा पेंशन योजना में संशोधन करने की जरूरत है। प्रदेश सरकार ने वृद्धा पेंशन की आयु 80 से घटाकर 70 साल की है।

नियमों में प्रावधान होने से बुजुर्गों से आधार कार्ड के नंबर मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना का सरलीकरण किया जाएगा ताकि वृद्धा पेंशन योजना में बुजुर्गों को परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को इस योजना का लाभ 1 जनवरी, 2018 से मिलना शुरू हो जाएगा।

राजीव सैजल ने यह जानकारी विधायक होशियार सिंह की ओर से पूछे गए प्रश्न के उतर में दी। होशियार सिंह ने अपने प्रश्न में कहा कि सरकार की ओर से आयु सीमा कम करना ऐतिहासिक फैसला है। 
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जब सीएम बोले, हम आप मिलकर बैठकर करेंगे बात

मुख्यमंत्री विधानसभा में तबादलों पर स्थिति स्पष्ट कर रहे थे। मुख्यमंत्री की बात खत्म होने के बाद सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने बोलने की इच्छा जताई। इस पर मुख्यमंत्री सिंघा से बोले - आप से मिल लेंगे। बैठकर बात करेंगे। 

जब विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट की स्थिति
विधानसभा में जब स्वास्थ्य संस्थान संबंधित मामले पर चर्चा हो रही थी, इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने भी स्थिति स्पष्ट कर डाली। मामला क्लीयर करने के बाद उन्होंने मंत्री को बोलने के लिए कहा, इस पर सदन में बैठे सदस्य हंसते हुए कहने लगे, अध्यक्ष महोदय, आपने सब कुछ तो क्लीयर कर दिया है।
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