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विधायकों के सैर सपाटे पर 1.70 करोड़ खर्च करेगी कर्ज में डूबी सरकार

Sun, 17 Apr 2016 11:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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विधायक अब यात्रा करने के लिए ढाई लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे।
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महज दस मिनट में अपना वेतन बढ़ा लेने वाले विधायक अब यात्रा करने के लिए ढाई लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। वेतन भत्तों में बदलाव के बाद अब उनकी ट्रांजिट फैसिलिटी के खर्चे को दो लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये प्रति विधायक प्रति साल कर दिया गया है।
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इस तरह प्रदेश के 68 विधायकों पर राज्य सरकार सालाना एक करोड़ सत्तर लाख रुपये चुकाएगी। वहीं पूर्व विधायकों के लिए भी इस मद में सवा लाख रुपये प्रति विधायक के हिसाब से खर्च तय किया गया है। वर्तमान विधायकों को इस ट्रांजिट भत्ते के अलावा 90 हजार रुपये का विधानसभा क्षेत्र भत्ता अलग से मिलेगा।

पहले यह भत्ता साठ हजार रुपये होता था। विधायकों को प्रदेश के अंदर मुफ्त में हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (एचआरटीसी) की बसों में मुफ्त सफर का लाभ तो मिलता ही है, इसके अलावा प्रदेश के बाहर दूसरे प्रदेशों की बसों, या ट्रेन अथवा हवाई यात्रा करने के लिए ट्रांजिट अलाउंस के मद में ढाई लाख रुपये की राशि रखी गई है।
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वहीं, विधायकों को अपने या दूसरे के वाहन से सफर करने के लिए भी प्रति किलोमीटर की दर से राशि का भुगतान किया जाता है। बस, रेल और हवाई सफर मुफ्त होने और निजी वाहन से सफर करने पर प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान मिलने के बावजूद विधायकों को वेतन बढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

बैकफुट पर भाजपा, कहा वेतन-भत्ते बढ़े पर अबकी बार हो गई अति

भाजपा उपाध्यक्ष गणेश दत्त
हिमाचल में मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ोतरी का चौतरफा विरोध हो रहा है। कर्मचारी, पेंशनरों से लेकर आम आदमी वेतन बढ़ोतरी को लेकर विरोध में उतर आए हैं। तर्क दिया जा रहा है कि एक कर्मचारी जो 30 से 40 साल सरकारी सेवा करता है, सेवानिवृत्त के बाद उसे पेंशन और अन्य वित्तीय लाभ के लिए भटकना पड़ रहा है।

लेकिन मंत्रियों और विधायकों के वेतन वृद्धि की बात आई तो पक्ष और सत्ता पक्ष को इस पर ऐतराज नहीं हुआ। मामला उछलने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वेतन भत्ते बढ़ें लेकिन उस सीमा तक जिसकी आलोचना न हो।

इस बार तो हद हो गई है। भाजपा उपाध्यक्ष गणेश दत्त ने फेसबुक पर कहा कि हिमाचल प्रदेश मंत्री विधायकों के अत्यधिक वेतन बढ़ाने से जनता में भारी रोष है। बढ़े वेतन भत्तों पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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दिवालियेपन की कगार पर प्रदेश की अर्थ व्यवस्था : धूमल

भाजपा नेता व पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि भ्रष्टाचार, कर्जा और बेलगाम नौकरशाही से प्रदेश की अर्थव्यवस्था दिवालियेपन के कगार पर खड़ी हो गई है। कैग रिपोर्ट के अनुसार सरकार की ओर से कर्ज लेने की प्रक्रिया में संवैधानिक प्रावधानों का सरेआम उल्लंघन किया गया है। अधिक समय तक इस सरकार का सत्ता में बने रहना प्रदेश हित के खिलाफ होगा।

धूमल ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है कि संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार करते हुए सरकार ने लगभग 38000 करोड़ रुपये का ऋ ण लिया। ऋण लेने की अधिकतम सीमा को दरकिनार करते हुए केवल पुराने ऋ ण का ब्याज चुकाने के लिए ही सरकार ने अधिक ब्याज दर पर ऋ ण लिया। कैग रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हो चुका है कि वर्ष 2018-19 तक प्रदेश कर्जों के मकड़जाल में पूरी तरह से फं स जाएगा।

वर्तमान समय में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि नवजात शिशु से लेकर प्रत्येक नागरिक के सिर पर 80000 रुपये कर्ज सरकार ने लाद दिया है। कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए न कोई नीति बनाई और न ही कोई निर्णय लिए। प्रदेश केवल केंद्रीय सहायता और ऋणों पर निर्भर होकर रह गया है।

प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर कांग्रेस सरकार जनता को लगातार गुमराह कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि ऋण लिए जा रहे पैसे का 76 प्रतिशत हिस्सा पुराने और उसके ब्याज को चुकाने में ही जा रहा है बाकि बचा 24 प्रतिशत पैसा सरकार के बेदर्दी खर्चों, भ्रष्टाचार और 40 से अधिक बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के ऐशोआराम पर खर्च किया जा रहा है। अगर सरकार को जल्द ही बर्खास्त नहीं किया गया तो प्रदेश असफ ल राज्यों की श्रेणी में खड़ा हो जाएगा।
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