हिमाचल के जनजातीय इलाकों में महिलाओं के बाद छोटे भाइयों को भी पैतृक संपत्ति का अधिकार मिलेगा। हिमाचल सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस संबंध में छह महीने के भीतर पॉलिसी बनाने को कहा है।
हिमाचल हाईकोर्ट ने हाल ही में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में महिलाओं को पैतृक संपत्ति का अधिकार देने के आदेश दिए थे। इसके बाद सरकार ने इन क्षेत्रों में छोटे भाइयों को भी पिता की संपत्ति का अधिकार देने की कवायद शुरू की है।
गौरतलब है कि किन्नौर, लाहौल-स्पीति और भरमौर जैसे जनजातीय क्षेत्रों में बेटियों और छोटे बेटों को पिता की संपत्ति का अधिकार नहीं है। यहां केवल बड़े बेटे को ही पिता की संपत्ति मिलती है।
बैठक में लिया गया फैसला
बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई हिमाचल प्रदेश ट्राइबल एडवाइजरी कौंसिल की बैठक में इस बारे में पॉलिसी बनाने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बड़ा घर, छोटा घर’ की परंपरा से इन क्षेत्रों में छोटे भाई के साथ अन्याय हो रहा है। इसके अलावा जनजातीय क्षेत्रों में भूमिहीन लोगों को नौतोड़ भूमि देने के लिए पॉलिसी में बदलाव करने को कहा गया है।
सीएम ने किन्नौर में लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड (लाडा) के तहत किए गए खर्च का 10 दिन के भीतर ब्योरा तलब करने के साथ ही काजा और लोसर तक 66केवी विद्युत लाइन कार्य में तेजी लाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाने और सर्वे कार्य प्राथमिकता से पूरा करने को कहा। किलाड़ क्षेत्र में बिजली कट की समस्या दूर करने और 15 दिन के भीतर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए।
साथ ही जनजातीय क्षेत्रों से अन्यत्र स्थानांतरित कर्मियों (पद समेत) का ब्योरा मुहैया कराने को कहा, ताकि ऐसे मामलों में स्थानांतरित किए गए पद वहां से हटाकर दोबारा जनजातीय क्षेत्रों में बहाल किए जाएं। लाहौल-पांगी भरमौर क्षेत्रों में शिक्षकों के विभिन्न पद शीघ्र भरने के निर्देश दिए। इस दौरान विधानसभा के उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी, राष्ट्रीय जन जाति आयोग के उपाध्यक्ष रवि ठाकुर, वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, मुख्य सचिव पी. मित्रा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वीसी फरका आदि उपस्थित रहे।
दो माह में भरेंगे डॉक्टरों के रिक्त पद
उन्होंने डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को दो माह के भीतर भरे जाने के साथ ही दवाओं की समुचित व्यवस्था के निर्देश भी दिए। चंबा से पांगी तक सुरंग निर्माण के सर्वे का कार्य भी जल्द पूरा किए जाने को कहा। काजा में एचआरटीसी डिपो स्थापित किए जाने के साथ ही उदयपुर में फर्टिलाइजर सब डिपो की स्थापना को भी सहमति दी गई।
फॉरेस्ट क्लीयरेंस को सब-कमेटी
जनजातीय क्षेत्रों में जमीनों की फॉरेस्ट क्लीयरेंस को लेकर मुख्यमंत्री ने सब-कमेटी भी गठित की। इसमें सेक्रेट्री ला, सेक्रेट्री फारेस्ट, सेक्रेट्री ट्राइबल डेवलपमेंट और पीसीसीएफ को शामिल किया गया है। यह सब कमेटी जुलाई 2014 में आए कोर्ट के आदेश के बाद फॉरेस्ट क्लीयरेंस के मामले देखेगी।
40 वर्ग मीटर से बड़े पालीहाउस पर विचार
लाहौल-स्पीति के किसानों के पालीहाउस निर्माण की मांग पर उन्होंने बागवानी और कृषि को विभिन्न डिजाइनों के पालीहाउस निर्माण करने के निर्देश दिए। 40 वर्ग मीटर से बड़े पालीहाउस निर्माण की मांग पर उन्होंने कहा कि यह मामला विचाराधीन है। जल्द फैसला होगा।
पहली बार पहुंची चार महिला प्रतिनिधि
हिमाचल प्रदेश ट्राइबल एडवायजरी कौंसिल की इस 44वीं बैठक में जनजातीय क्षेत्र से पहली बार चार महिला प्रतिनिधियों ने शिरकत की। सीएम ने इस पर खुशी जताई। कहा कि इन क्षेत्रों के लिए 2015-16 में 984.53 करोड़ खर्च होने हैं। सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण प 47.36, जबकि स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए 68.01 करोड़ रुपये खर्च होंगे।