हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में कार्यरत आउटसोर्स आईटी शिक्षकों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी। इसके लिए राज्य सरकार पीजीटी आईपी के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में बदलाव करने जा रही है।
स्कूलों में पांच साल पूरा करने वाले आईटी शिक्षकों को प्राथमिकता का प्रावधान किया जा रहा है। सरकार मई से इसकी प्रक्रिया शुरू कर देगी। कंपनी के तहत तैनात इन शिक्षकों के लिए पांच साल का अनुभव होना जरूरी है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह डलहौजी की विधायक आशा कुमारी के सवाल का जवाब दे रहे थे। प्रदेश में 1484 कंप्यूटर शिक्षक कंपनियों के तहत सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं।
इन शिक्षकों को होगा फायदा
इसमें 1006 फेकल्टी जबकि 459 जूनियर फेकल्टी और 19 जूनियर फेकल्टी प्रशिक्षु हैं। इनके अलावा सरकारी स्कूलों में 767 शिक्षक पीजीटी (आईपी) को अनुबंध आधार पर तैनात किया गया है। सरकारी स्कूलों में छठी से बारहवीं कक्षा तक कंप्यूटर की शिक्षा दी जा रही है।
प्रत्येक स्कूल में दो-दो अध्यापकों की तैनाती की गई है। हालांकि कई स्कूल ऐसे भी हैं, जहां एक कंप्यूटर शिक्षक सरकारी है जबकि दूसरा कंपनी के तहत तैनात किया गया है। इसी तरह कई स्कूलों में दोनों अध्यापक कंपनी के तहत ही सेवाएं दे रहे हैं।
पार्किंग के लिए भी सीएम का खास प्लान
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल पार्किंग की समस्या को सुलझाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल करके कमेटी का गठन किया जाएगा। शहरी विकास विभाग नोडल एजेंसी होगी।
यह कमेटी प्रदेश में मुख्य स्थानों में तय समय में पार्किंग के स्थानों को चयनित कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। वह वीरवार को विधानसभा में विधायक आशा कुमारी की ओर से निजी कार्य दिवस पर लाए गए संकल्प का जवाब दे रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन विभाग प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 20 साल के मास्टर प्लान पर कार्य कर रहा है। अब तक प्रदेश में 52 पार्किंग बनाई जा चुकी हैं। 15 पार्किंग बनाने का काम चल रहा है। 28 स्थान चयनित किए गए हैं। इसके अलावा शिमला, धर्मशाला और डलहौजी में मेगा पार्किंग स्थलों का निर्माण किया जा रहा है।