हिमाचल में गांवों की तरह अब शहरों में भी लोगों को मनरेगा की तर्ज पर रोजगार मिलेगा। प्रदेश सरकार ने मनरेगा की तर्ज पर लाल बहादुर शास्त्री कामगार एवं शहरी आजीविका योजना (लक्ष्य) लागू कर दी है।
शुक्रवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी विकास) मनीषा नंदा ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। अभी यह योजना 3 वर्ष के लिए होगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बजट भाषण में शहरी क्षेत्र के लोगों को रोजगार के लिए यह योजना शुरू करने की घोषणा की थी।
अब शहरों में काम के लिए बेरोजगारों को भटकना नहीं पड़ेगा। मनरेगा की तरह शहरी क्षेत्रों के लोगों के भी जॉब कार्ड बनेंगे। यह कार्ड नगर निगम और नगर निकायों में बनेंगे।
लक्ष्य योजना के तहत 70 फीसदी पैसा कामगारों और 30 फीसदी पैसा मैटीरियल पर खर्च होगा। यह योजना नगर पालिकाओं के सभी विलय किए गए वार्ड तथा नव निर्मित नगर पंचायतों में लागू की जाएगी।
ये होंगे कार्य, मिलेंगे इतने पैसे
नगर निगम और शहरी निकायों में नालियों की सफाई, सड़कों की मरम्मत, रेलिंग, वर्षा शालिका का निर्माण, कॉलोनियों और कस्बों के लिए रास्तों का निर्माण, सफाई व्यवस्था, नालों की चैनलाइजेशन, पार्किंग का निर्माण आदि कार्यों में सेवाएं ली जाएंगी।
नई नगर पंचायतों में मिलेंगे 10 लाख
नई नगर पंचायतों को प्रदेश सरकार 10 लाख रुपये देगी, जबकि नगर निगम में मर्ज किए गए प्रति वार्ड को रोजगार के लिए 10 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें बेरोजगार लोगों को 200 से ढाई सौ दिन तक का रोजगार मिल सकता है।
रूल्स बनेंगे, दिहाड़ी होगी तय : नंदा
अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी विकास) मनीषा नंदा ने कहा कि हिमाचल में लक्ष्य योजना की अधिसूचना जारी कर दी है। योजना को धरातल पर उतारने के लिए सप्ताह के भीतर नियम बनेंगे। दिहाड़ी भी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में यह नई योजना शुरू की गई है। इसमें हजारों लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान होंगे।