इस क्षेत्र में कीमती लकड़ियों वाले पेड़ों, उच्च गुणवत्ता वाले फल और चारे की प्रजातियों, उच्च आर्थिक मूल्यों वाले औषधीय पौधोें और गैर वन उत्पाद पौधों की प्रजातियां उगाएंगे। इससे उनकी आय भी बढ़ेगी।
अनारदाना, चिलगोजा, बुरांस के फूल, काफल, चूली, हरड़, आंवला आदि के अलावा टोकरियां बनाने के लिए बांस उगाने को प्रोत्साहन मिलेगा। पहले साल इस योजना को राज्य के दस स्थानों पर लागू किया जाएगा।
वन विभाग हर साल इस योजना पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च करेगा। श्रेणी ए की समितियों को इसके लिए हर साल 10 हजार रुपये तक मदद मिलेगी। अगर नर्सरियां लगानी हों तो ऐसे में समितियों को संबंधित डीएफओ एक लाख रुपये तक की मदद करेंगे।