हाईकोर्ट के आदेश के पर शिक्षा महकमा हरकत में आ गया। आदेश को बाकायदा अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू हो गई। विभाग ने वर्षों से शिमला शहर के स्कूलों में डटे 50 से अधिक शिक्षकों की पहली तबादला सूची तैयार कर दी है।
इसमें याचिकाकर्ता शिक्षिका का स्थानांतरण मतियाना से शिमला के एक स्कूल में कर दिया गया है। इसके अलावा 12 अन्य शिक्षकों के भी तबादला स्थल तय तक डिप्टी डायरेक्टर प्राइमरी ऑफिस से रिपोर्र्ट निदेशक को सौंप दी गई है।
40 से अधिक जेबीटी शिक्षकों को पहली तबादला सूची भी तैयार हो चुकी है। हालांकि फाइल पर सरकार की मोहर लगने से पूर्व इसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। अब निदेशालय टीजीटी शिक्षकों की दूसरी तबादला सूची तैयार करने में जुटे हुए हैं।
कोर्ट ने दिए हैं ट्रांसफर के आदेश
इसके बाद एक और सूची तैयार कर सरकार को सौंप दी जाएगी। हाईकोर्ट ने 6 जनवरी को याचिकाकर्ता सुषमा देवी की याचिका की सुनवाई के बाद सरकार को शहर के स्कूलों में वर्षों से डटे शिक्षकों को दो सप्ताह के भीतर शहर से बाहर 30 किलोमीटर के दायरे में स्थानांतरित करने के आदेश दिए थे।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि विभाग ने राजनीतिक संरक्षण प्राप्त शिक्षकों को लंबे अरसे से शिमला और आसपास के स्कूलों में तैनाती दे रखी है। याचिकाकर्ता ने इसे गलत करार दिया था। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अशोक शर्मा ने कहा कि डिप्टी डायरेक्टर ऑफिस द्वारा तैयार पहली स्थानांतरण सूची की जांच की जा रही है, मंगलवार को इसे अंतिम स्वरूप देकर सार्वजनिक किया जाएगा।
शिक्षा निदेशालय में भर्ती शुरू
वहीं, शिक्षा विभाग के 124 खंडों में खंड स्रोत समन्वयकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। सोमवार को शिमला स्थित सर्व शिक्षा अभियान निदेशालय में साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। पहले दिन चंबा और बिलासपुर जिलों के लिए बीआरसीसी पदों के लिए साक्षात्कार हुए।
मंगलवार को हमीरपुर और कांगड़ा जिला के उम्मीद्वारों को आमंत्रित किया गया है। ये साक्षात्कार सप्ताह भर चलेंगे। राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान और सर्व शिक्षा अभियान की नियुक्तियों पर सवाल उठ चुके हैं। हर ब्लॉक में दो-दो बीआरसीसी रखे जाने हैं।
विवादों के बीच विभाग ने साक्षात्कार तो शुरू कर लिए हैं, जबकि मामला कोर्ट में भी विचाराधीन है। प्रदेश के 124 शिक्षा खंडों में में 248 पदों के लिए पर्याप्त पात्र शिक्षक नहीं मिल रहे हैं, जिस पर शिक्षक संघों ने सवाल उठाते हुए पूरी प्रक्रिया बंद करने की मांग की थी।