हिमाचल के विभिन्न विभागों, निगमों और बोर्डों में तैनात अनुबंध कर्मचारियों के लिए ट्रांसफर होने के बाद ज्वाइनिंग की समय अवधि तय कर दी गई है। पहले ट्रांसफर होने पर ज्वाइन करने के लिए कोई निश्चित समय तय नहीं था। स्थानांतरण होते ही अनुबंध कर्मचारी को नए स्थान पर ज्वाइन करना पड़ता था।
प्रदेश सरकार के कार्मिक विभाग ने नई व्यवस्था करते हुए 150 किलोमीटर के दायरे में ट्रांसफर होने वाले अनुबंध कर्मचारी को नए स्टेशन पर ज्वाइनिंग देने के लिए तीन दिन की मोहलत दी है। 151 किलोमीटर से 200 किलोमीटर तक के दायरे में चार दिन और 200 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित क्षेत्रों में ज्वाइनिंग के लिए छह दिन का समय दिया गया है।
सभी विभागों को जारी किए निर्देश
कार्मिक विभाग ने इन आदेशों का पालन करने के लिए सभी विभागों को आदेश भी जारी कर दिए है। प्रदेश में 35 हजार से अधिक अनुबंध कर्मचारी विभिन्न, निगमों और बोर्डों में तैनात हैं। पांच साल के सेवाकाल के बाद इन्हें नियमित करने का सरकार ने फैसला लिया है।
नियुक्ति के तीन साल बाद अनुबंध कर्मचारियों का तबादला करने का प्रावधान है। कार्मिक विभाग की अधिसूचना में ज्वाइनिंग की अवधि तय करने के अलावा नए स्टेशन पर जाने का खर्च देने की बात भी कही गई है। बशर्ते ट्रांसफर जनहित में हो। अगर कोई कर्मचारी स्वयं अपना तबादला कहीं करवाता है तो उसे आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्मिक एसकेबीएस नेगी ने बताया है कि पहले ऐसी व्यवस्था नहीं थी। अब दूरी के हिसाब से ज्वाइनिंग के लिए अनुबंध कर्मियों को समय दिया गया है। जनहित में होने वाली ट्रांसफर पर ट्रैवलिंग अलाउंस भी दिया जाएगा।
वहीं, ट्रेनिंग शुरू न होने से पैट नाराज
प्रदेश के 3382 प्राथमिक सहायक अध्यापकों ने उनकी ट्रेनिंग शुरू न होने पर नाराजगी जताई है। अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन ठाकुर, उपाध्यक्ष रामपाल, सरला, महासचिव जगमोहन राणा, कोषाध्यक्ष आत्माराम, सलाहकार घनश्याम, प्रवक्ता चंदन नेगी और अस्थायी अध्यापक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील चौहान ने कहा है कि 22 जुलाई को एक प्रतिनिधिमंडल पैट की विभिन्न मांगों को लेकर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक से मिला था।
बीएड पास पैट का प्रशिक्षण शुरू करवाने की मांग और अन्य मांगों के लिए निदेशक ने प्रतिनिधि मंडल को लिखित जवाब दिया था कि 15 अगस्त तक ट्रेनिंग का एमओयू साइन किया जाएगा। ट्रेनिंग 1 सितंबर से शुरू की जाएगी। न तो अभी तक एमओयू साइन हुआ है और न ही कोई प्रक्रिया शुरू हुई है।
विभाग कर रहा लेटलतीफी
पैट ने आरोप लगाया है कि उनका शोषण हो रहा है। पदाधिकारियों का आरोप है कि विभाग ने 2011 और 2012 में प्रदेश की डाइटों में इनको करोड़ों रुपये खर्च कर 2 साल का प्रशिक्षण भी दिया लेकिन प्रशिक्षण के 2 साल पूरा होने के बाद प्रशिक्षण को यह कहकर रद कर दिया कि इसके लिए केंद्र की अनुमति नहीं थी। संघ के प्रवक्ता चंदन नेगी ने कहा कि इसमें अध्यापकों की क्या गलती थी।
उनके जीवन के कीमती 2 साल तो विभाग की गलतियों से बर्बाद हुए ही और वह नियमितीकरण से 2 साल और दूर चले गए। अब 2 साल की ट्रेनिंग एनआईओएस से दोबारा से करवाई जा रही है। इसमें बिना बीएड वाले पैट 2 साल का प्रशिक्षण जिसे डीएलएड कहा जाता है, कर रहे हैं।
इसमें वह प्रथम वर्ष पास कर चुके हैं। अब दूसरे साल का प्रशिक्षण जारी है, लेकिन जो अध्यापक बीएड धारक हैं, उनका सिर्फ 6 महीने का प्रशिक्षण होना है। जो अभी तक शुरू ही नही किया गया है इसको लेकर लेटलतीफी हो रही है।