पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि सरकार ने बिना अध्ययन कर बसों का किराया बढ़ा दिया। फैसले लेने से पहले सरकार को यह सोचना चाहिए था कि इससे जनता पर क्या असर पड़ेगा। सरकार को जनता पर वित्तीय बोझ डालने के बजाय पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि निजी आपरेटरों की हड़ताल मात्र एक औपचारिकता थी। सरकार ने पहले ही किराया बढ़ाने का मन बना लिया था। उन्होंने दावा किया है कि किराया बढ़ाने से परिवहन निगम और घाटे में जाएगा। चूंकि निजी ऑपरेटर किराये में सब्सिडी देंगे, परिवहन निगम ऐसा नहीं कर सकता है।
इससे साफ है कि परिवहन निगम की बसों में लोग कम सफर करेंगे। उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री कैबिनेट बैठक में भी नहीं थे। ऐेसे में सरकार ने उनके बिना ही कैबिनेट में इसे स्वीकृति दे दी।