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किराया बढ़ाने से भारी विरोध के बीच उलझन में सरकार, ये फैसला लेने की तैयारी

Fri, 28 Sep 2018 01:10 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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निजी बस ऑपरेटरों के दबाव में आकर हिमाचल में किराया बढ़ाकर चौतरफा विरोध से घिरी प्रदेश सरकार अब उलझन में पड़ गई है। 24 सितंबर को कैबिनेट बैठक हुई थी लेकिन अभी तक सचिवालय से फाइल परिवहन निगम को नहीं भेजी गई है।

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इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार इस पर फिर से विचार कर रही है। परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने भी न्यूनतम किराया कम करने के संकेत दिए हैं। यह न्यूनतम किराया 6 रुपये से कम कर 5 रुपये हो सकता है। हालांकि लंबी दूरी में बस किराये के फैसले को वापस नहीं लिया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने न्यूनतम किराये को दोगुना किया है। पिछली कांग्रेस सरकार में किराया 3 रुपये निर्धारित था। यही नहीं अन्य किराये में 20 से 24 फीसदी की बढ़ोतरी की है। कांग्रेस ने विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
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माकपा ने भी 1 अक्तूबर से सड़क पर उतरने का फैसला लिया है। परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि  न्यूनतम किराया 6 रुपये किया है, इस मामले पर फिर से विचार हो रहा है। कांग्रेस बेवजह मामले को तूल दे रही है।

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बिना अध्ययन किए सरकार ने बढ़ा दिया किराया : बाली

पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि सरकार ने बिना अध्ययन कर बसों का किराया बढ़ा दिया। फैसले लेने से पहले सरकार को यह सोचना चाहिए था कि इससे जनता पर क्या असर पड़ेगा। सरकार को जनता पर वित्तीय बोझ डालने के बजाय पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि निजी आपरेटरों की हड़ताल मात्र एक औपचारिकता थी। सरकार ने पहले ही किराया बढ़ाने का मन बना लिया था। उन्होंने दावा किया है कि किराया बढ़ाने से परिवहन निगम और घाटे में जाएगा। चूंकि निजी ऑपरेटर किराये में सब्सिडी देंगे, परिवहन निगम ऐसा नहीं कर सकता है।

इससे साफ है कि परिवहन निगम की बसों में लोग कम सफर करेंगे। उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री कैबिनेट बैठक में भी नहीं थे। ऐेसे में सरकार ने उनके बिना ही कैबिनेट में इसे स्वीकृति दे दी। 
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