हिमाचल की सरकार छोटी उम्र के खिलाड़ियों को खेल के दौरान भर पेट भोजन के लिए भी बजट नहीं दे पा रही। सरकार स्कूली खिलाड़ियों को तराशकर देश-दुनिया में पदक तो बटोरना चाहती है लेकिन इनकी डाइट मनी बढ़ाने को तैयार नहीं दिखती।
स्कूलों की इन मासूम प्रतिभाओं को आधे पेट विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना पड़ता है या ग्रामीणों के चंदे पर धाम खाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। शिक्षा विभाग ने प्रति खिलाड़ी ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर और एक चाय के लिए 50 रुपए प्रतिदिन का प्रावधान किया है।
यह हाल तब है, जब खुद सरकार ने आम लोगों के लिए एक वक्त के खाने की कीमत 60 रुपए तय की है।
खुद का वेतन एक मिनट में बढ़ा दिया था
मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्तों को एक मिनट में सर्वसम्मति से बढ़ाने वाली हिमाचल सरकार की ओर से प्राइमरी स्कूलों की खंड स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी को प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से बजट देना बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
शिक्षा विभाग के पास बजट की कमी के चलते खंड स्तरीय प्रतियोगिताओं के दौरान ग्रामीणों और स्थानीय शिक्षकों को खुद छोटे-छोेटे बच्चों के भोजन का इंतजाम करना पड़ रहा है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग भी इस प्रथा को बंद नहीं करना चाहता।
मजबूर खिलाड़ी ग्रामीणों की धाम खा रहे
बजट की कमी से जूझ रहे शिक्षा विभाग ने भी ग्रामीणों की ओर से दी जाने वाली धाम को अपनी मूक सहमति दी हुई है। अफसरों को मालूम है कि 50 रुपये में तीन वक्त का भोजन खिलाड़ियों को देना मुमकिन नहीं है। उल्लेखनीय है कि बीते वीरवार को सिरमौर जिले के शिलाई इलाके में भी ऐसी ही एक खेल प्रतियोगिता के दौरान ग्रामीणों की ओर से दी गई धाम खाकर 100 खिलाड़ी बीमार हो गए थे।
डाइट मनी बढ़ाने का भेजेंगे प्रस्ताव
निदेशक प्रारंभिक शिक्षा मनमोहन शर्मा ने बताया कि खंड स्तरीय प्रतियोगिताओं की डाइट मनी को 40 से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया है। सरकार को प्रस्ताव भेजकर डाइट मनी को और बढ़ाने की मांग की जाएगी।
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