हिमाचल में विकास कार्य करवाने के लिए पंचायतों को अब बीडीओ की अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। सरकार ने खंड विकास अधिकारियों की शक्तियों में कटौती की है। अब विकास कार्य करने के लिए पंचायतें ग्रामसभा से प्रस्ताव पारित करेंगी।
इसके बाद मामला डीएफसी (जिला योजना समिति) में जाएगा। यहां से फाइल पंचायतीराज विभाग में आएगी। दो दिन में पंचायतों के खाते में पैसा डाला जाएगा। अभी सरकार से पैसा जारी होने के बाद विकास कार्यों के लिए बीडीओ से अनुमति लेनी होती थी।
बीडीओ विकास कार्यों में तरह-तरह की आपत्तियां लगा रहे थे। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि 14वें वित्तायोग के तहत पंचायतों को विकास कार्यों के लिए बीडीओ से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। पंचायतीराज विभाग के प्रधान सचिव ओंकार शर्मा ने यह आदेश जारी किए हैं।
प्रदेश सरकार ने 6 अप्रैल को उपायुक्त, खंड विकास अधिकारी, जिला परिषद, पंचायत समिति अध्यक्ष, जिला पंचायत अधिकारी को पत्र जारी कर यह आदेश दिए हैं। सरकार की ओर से जारी पत्र में बजट सत्र 2016-17 में विपक्ष की ओर से उठाए गए मामले का भी जिक्र किया है।
इसमें कहा है कि विकास खंड अधिकारी पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए प्रशासनिक स्वीकृतियां प्राप्त कर निर्देश दे रहे थे। प्रस्ताव पर यह अधिकारी तरह-तरह की शर्तें लगाकर पैसा खर्च करने में विलंब पैदा कर रहे थे। इसके बाद प्रदेश सरकार ने यह आदेश पारित किए हैं।
पंचायतों में 19 विकास कार्यों को जारी होता है पैसा
14वें वित्तायोग के तहत पंचायतों के लिए 19 विकास कार्यों के लिए पैसा जारी होता था। इसमें रास्ते, सड़कों का निर्माण, वर्षाशालिका, श्मशानघाट, स्कूल निर्माण, सामुदायिक भवन, स्ट्रीट लाइटें, शौचालय का निर्माण, गौशालाएं, कूड़ादान आदि कार्य शामिल हैं।
466 करोड़ में से खर्च हुए 57.39 करोड़
केंद्र सरकार ने पंचायतों के विकास कार्य के लिए 2015-16 और 2016-17 में 466.20 करोड़ रुपये जारी किए हैं, लेकिन पंचायतों में अभी 57.39 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। इसका कारण समय पर एनओसी, फॉरेस्ट क्लीयरेंस और विकास कार्यों में लगातार आपत्तियां लगाया जाना शामिल है।