इस दौरान जलंधर से लेकर चंडीगढ़, दिल्ली तक अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्ति की जांच की गई लेकिन ब्यूरो को सफलता हाथ नहीं लग सकी। चूंकि मामला सीधे मुख्यमंत्री के निर्देशों से जुड़ा था, इसलिए ब्यूरो ने जांच को बंद भी नहीं किया।
लेकिन जयराम सरकार के सत्ता में आते ही धूमल के खिलाफ चल रही इन्क्वायरी को बंद करने का दबाव शुरू हो गया। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री कार्यालय ने ब्यूरो से धूमल परिवार के केसों से संबंधित पूरा ब्योरा तलब किया।
जब पांच साल की प्रारंभिक जांच में कोई साक्ष्य न मिलने की बात सामने आई तो धूमल मामले की जांच बंद कर दी गई। हालांकि मामले में ब्यूरो ने अभी भी अनुराग व अरुण की जांच को बंद नहीं किया है।