बीसीसीआई अध्यक्ष पद से चार दिन पहले हटाए गए अनुराग ठाकुर की अगुवाई वाली हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) को अब वीरभद्र सरकार ने बड़ा झटका दिया है।
बुधवार को राज्य के मंत्रिमंडल की बैठक में जिला कांगड़ा के नूरपुर में आउटडोर स्टेडियम के निर्माण का समझौता रद्द कर दिया गया है। युवा सेवाएं एवं खेल विभाग ने पांच मई 2012 को नूरपुर में स्टेडियम और मैदान निर्माण के लिए एचपीसीए के साथ समझौता किया था।
आरोप है कि एचपीसीए ने स्टेडियम का समझौते की शर्तों के अनुरूप काम शुरू नहीं किया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय शिमला में बुधवार सवेरे दस बजे शुरू हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बेरोजगारी भत्ते के मुद्दा का छाया रहा।
वहीं राज्य सरकार ने एचपीसीए को झटका देते हुए ये आक्रामक फैसला लिया। ये बैठक करीब तीन घंटे तक चली। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल की अध्यक्षता में कैबिनेट ने नूरपुर में स्टेडियम निर्माण के लिए एचपीसीए से समझौता करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
सरकार ने इसलिए रद्द किया समझौता
पांच मई 2012 को युवा सेवाएं एवं खेल विभाग ने एचपीसीए के साथ समझौता किया। इस समझौते के तहत तीस साल के लिए नूरपुर का चौगान मैदान एचपीसीए को लीज पर दिया गया था। नगर परिषद नूरपुर से भूमि ट्रांसफर की गई थी।
खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नूरपुर स्टेडियम में मूलभूत निर्माण कार्य करवाए जाने के लिए मैदान लीज पर दिया गया था। बुधवार को कैबिनेट ने नियमानुसार काम नहीं होने पर इस समझौते को ही रद्द करने का फैसला लिया ले लिया।
सीएम खुद भी दो बार कर चुके थे शिलान्यास
बता दें कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुद भी नूरपुर चौगान मैदान में स्टेडियम बनाने के लिए दो बार शिलान्यास कर चुके थे। साल 2005 में स्टेडियम निर्माण के लिए 1.82 करोड़ का बजट भी जारी हुआ था। उस दौरान स्टेडियम का काम भी शुरू हुआ था।
साल 2012 में भाजपा सरकार ने स्टेडियम का निर्माण करने के लिए एचपीसीए के साथ समझौता किया। दिसंबर 2012 में हिमाचल में सत्ता परिवर्तन हुआ। कांग्रेस सरकार बनने पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एचपीसीए को लीज पर दिए गए मैदान के समझौते को रद्द करने की घोषणा की थी। उन्होंने मैदान में बहुउद्देश्यीय स्टेडियम बनाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक समझौता रद्द नहीं किया गया था।
चार साल बाद क्यों रद्द किया एग्रिमेंट : पठानिया
पूर्व विधायक राकेश पठानिया ने कहा कि कांग्रेस के नूरपुर के विधायक की नाकामी की वजह से क्षेत्र के जनता को आज एक और बड़ा नुकसान हुआ है। नूरपुर के युवाओं को मिला स्पोट्र्स स्टेडियम कांग्रेस ने छीन लिया।
अगर कांग्रेस सरकार को एचपीसीए के साथ हुआ एग्रिमेंट रद्द ही करना था तो चार साल पहले करती। चार साल बाद एग्रिमेंट रद्द करने का क्या औचित्य है। आखिर सरकार चाहती क्या है। अगर एग्रिमेंट रद्द करना था तो साथ ही नए प्रोजेक्ट के लिए नया पैसा सरकार जारी करती।
लगता है कि अब सीएम और बाली की राजनीतिक लड़ाई में नूरपुर के विधायक को धकेला जा रहा है और इसमें पिस जनता रही है। इसकी बानगी इसी से देखी जा सकती है कि मंगलवार को बाली ने नूरपुर बस स्टैंड का शिलान्यास किया जिसे पहले सीएम ने करना था। इससे अगले ही दिन सीएम ने नुरपुर को मिले स्टेडियम का एग्रिमेंट कैबिनेट में रद्द कर दिया।
नौजवानों के साथ किया भेदभाव : संजय
एचपीसीए प्रवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि नूरपुर के पूर्व विधायक राकेश पठानिया ने क्षेत्र में खेल गतिविधियों को गति देने के लिए एचपीसीए और सरकार के समक्ष क्रिकेट स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद पूर्व भाजपा सरकार ने स्टेडियम के लिए जमीन का एग्रिमेंट एचपीसीए के साथ किया था।
लेकिन, सूबे में सत्ता बदलने के बाद कांग्रेस सरकार ने युवाओं के लिए बनने वाले स्टेडियम के प्रति उत्साह नहीं दिखाया। वर्तमान स्थानीय कांग्रेस विधायक ने नूरपुर में स्टेडियम का काम रुकवा दिया। प्रदेश सरकार खेलों के प्रति कभी भी गंभीर नहीं रही। अब राजनीतिक भेदभाव की वजह से एग्रिमेंट को सरकार ने रद्द कर दिया। यह तो नौजवानों के साथ भेदभाव है।