राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि भारतीय सभ्यता सबसे प्राचीन और संपन्न है। सभ्यता की सबसे बड़ी सुंदरता यह है कि यह सहानुभूति, करुणा और संवेदनशीलता जैसे प्रेरणादायक गुणों को विकसित करके व्यक्तियों में मानवता के मूल्यों को बढ़ावा देती है। इन गुणों से समाज में एकत्व एवं भाईचारे की भावना मजबूत होती है और शांति को बढ़ावा मिलता है।
हमारे समृद्ध पारंपरिक साहित्य, पारंपरिक मूल्यों और प्राचीन ज्ञान को अपनाने की आवश्यकता है, जिन्हें वर्तमान समय में लगभग भुलाया जा चुका है।राज्यपाल बुधवार को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित भारतीय संस्कृति एवं गोसेवा के एक कार्यक्रम में युग पुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ महाराज की 19वीं वर्षगांठ और महंत अवैद्यनाथ महाराज की 4वीं वर्षगांठ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल को भारतीय संस्कृति के विकास और गो संरक्षण में उनके योगदान के दृष्टिगत कार्यक्रम में आमंत्रित किया था। वेद ज्ञान और बौद्धिक विकास के समृद्ध स्रोत हैं और युवाओं को इनकी जानकारी होनी चाहिए। भारत आध्यात्मिक विचारों का देश है और सदियों से हमारी परंपरा उदार रही है। मानव सेवा एवं कल्याण हमारा उद्देश्य रहा है।
राज्यपाल ने किसानों से शून्य लागत प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। देश की उन्नति कृषकों की उन्नति एवं तरक्की पर निर्भर करती है। बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ अभियान की प्रशंसा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमारी सभ्यता में स्त्रियों को ऊंचा दर्जा प्राप्त है।जिस समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, वह समाज उन्नति करता है।
युवाओं से कहा कि वे राष्ट्र को मजबूत करने के लिए आगे आएं। नशीली दवाओं के खिलाफ और स्वच्छता से संबंधित अभियानों में बढ़-चढ़कर भाग लेकर जागरूक करें। स्वस्थ जीवन शैली को प्रोत्साहित करने के लिए प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। खेती एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की खुशहाली के लिए सुदृढ़ करना चाहिए।