लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के बीच सरकार ने सस्ते राशन के डिपुओं में दी जाने वाली दालों के टेंडर रद्द कर दिए हैं। टेंडर दो दिन पहले ही खोले गए थे।
इनके जरिये अगले छह महीने के लिए दालों की सप्लाई ली जानी थी। खुले बाजार में दालों के दाम में करीब 15 फीसदी तक वृद्धि के बाद वर्तमान रेट पर खरीद संभव नहीं थी।
इसके लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी को बढ़ाए जाने की जरूरत थी। आचार संहिता के दौर में बिना चुनाव आयोग की अनुमति के ये संभव नहीं था, इसलिए टेंडर रद्द कर दिए गए हैं।
डिपुओं में कमी की आशंका नहीं
वर्तमान में तीन दालें सरकार सस्ते रेट पर डिपुओं में दे रही है। हालांकि, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम एवं विभाग के पास अगले डेढ़ महीने के लिए दालों की सप्लाई है, इसलिए डिपुओं में इनकी कमी होने की आशंका नहीं है।
दूसरी ओर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम ने गेहूं की पिसाई की प्रक्रिया को भी बदल दिया है। अब आटा चक्कियों या फ्लोर मिलों को गेहूं का कोटा आवंटित करने के बजाय अब इसके लिए टेंडर होंगे।
टेंडर से आटा चक्की का चयन होगा और टेंडर में दिए रेट के हिसाब से काम दिया जाएगा। हिमाचल में 100 से अधिक फ्लोर मिलें हैं और इनमें से केवल 13 ने इस बार टेंडर भरा है।