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नोटबंदी में जमा करवाए 10 करोड़, फिर विभाग ने की ये बड़ी कार्रवाई

Mon, 18 Sep 2017 02:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
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नोटबंदी के दौरान 10 करोड़ रुपये अपने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की दो फर्मों के खातों में जमा करवाने वाले उद्यमी के मामले की जांच आबकारी एवं कराधान विभाग (उड़नदस्ता) दक्षिण क्षेत्र ने पूरी कर ली है। जांच में टैक्स की अदायगी को लेकर भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। 
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कारोबारी परवाणू से संबंधित है। मंडी समेत सूबे के अपने अन्य डीलर कारोबारियों को बिजली के उत्पाद बेचकर वैट (मूल्य वर्धित कर) और सीएसटी के नाम पर भारी वसूली करता रहा। बाद में टैक्स की रकम को करमुक्त दिखाकर सरकारी खाते में मात्र कुछ हजार डालकर सरकार और विभाग की आंखों में धूल झोंकता रहा। बाकी कालेधन के रूप में आरोपी अपनी जेब गर्म करता रहा। 

अपने लग्जरी वाहन का टैक्स भी सरकार से माफ करवाता रहा। आबकारी एवं कराधान विभाग ने उसे 14 सितंबर को एक करोड़ 70 लाख का कर और जुर्माना लगाया है। कारोबारी ने करीब 25 लाख रुपये सरकार को दे दिए हैं। शेष राशि के लिए उसे दो माह का समय दिया गया है। यह केवल एक फर्म से संबंधित कार्रवाई की गई है। एक अन्य फर्म की जांच जारी है। 
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उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त उड़नदस्ता दक्षिण क्षेत्र डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि मामला सुलझाने में आबकारी एवं कराधान अधिकारी डॉ. अमित शोष्टा, इंस्पेक्टर रीमा सूद, इंसपेक्टर रूपेंद्र सिंह तथा इंस्पेक्टर कुलदीप शर्मा ने काफी सहयोग किया। 10 करोड़ की रकम को लेकर आयकर विभाग भी जांच कर रहा है।  

यह है मामला 
आबकारी एवं कराधान विभाग को सूचना मिली थी कि नोटबंदी के दौरान एक व्यापारी ने अपनी दो फर्मों के खातों में लगभग 10 करोड़ जमा करवाए हैं। व्यापारी की परवाणू स्थित दो फर्मों का फरवरी में निरीक्षण किया गया। शुरू में उसने जांच प्रक्रिया से बचने की कोशिश की, किंतु विभाग ने उसका टिन (टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर) ब्लॉक करने के साथ अन्य ऑनलाइन सेवाएं बंद कर दीं। इस पर व्यापारी को जांच प्रक्रिया में शामिल होना पड़ा। सितंबर में यह जांच पूरी हुई है।  

 ट्रक का सामान स्कूटर और बाइक नंबरों पर ढोया  
व्यापारी प्रदेश के बाहर से प्रत्येक वर्ष करोड़ों का सामान लाता था, फिर इससे इलेक्ट्रॅनिक्स वस्तुओं का निर्माण करता था। वह इन तैयार वस्तुओं को प्रदेश में बेचता था तथा कुछ भाग प्रदेश के बाहर भी भेजता था। जांच में यह भी पाया गया कि विभागीय बैरियरों पर दर्शाए गए आयातित सामान और व्यापारी की ओर से रिटर्न पर अंकित आयात में काफी अंतर है। व्यापारी द्वारा भारी-भरकम सामान ढोने के लिए प्रयोग में दिखाए गए कुछ वाहन स्कूटर, मोटरसाइकिल या कारें थीं। इन पर भारी सामान ढोना संभव नहीं था। यही नहीं, प्रदेश के बाहर स्थित कुछ व्यापारी फर्जी भी पाए गए। 

 लग्जरी गाड़ियों का टैक्स भी करवाया माफ 
व्यापारी ने अपने लिए खरीदी एक महंगी कार पर दिए टैक्स का कर भी अदायगी करते समय आईटीसी (इनकम टैक्स क्रेडिट) के रूप में क्रेडिट ले डाला। यह गोरखधंधा काफी समय से चल रहा था। पकड़े जाने पर व्यापारी ने फर्म की गलती तो कबूल तो कर ली, परंतु इस गलती का ठीकरा अपनी अकाउंट ब्रांच के सिर पर फोड़ दिया। यद्यपि जांच के दौरान यह पूरी तरह से सिद्ध हुआ कि असली दोष व्यापारी ही का था और वह जानबूझ कर इस टैक्स चोरी में संलिप्त था।
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लाखों डकार कर फरार हो गई कंपनी

जिला मुख्यालय से एक और निजी कंपनी निवेशकों का लाखों रुपया डकार कर फरार हो गई है। गांधी चौक स्थित कंपनी के दफ्तर पर अचानक ताला लटकने से सैकड़ों निवेशकों की धुकधुकी बढ़ गई है। कंपनी में 500 से अधिक निवेशकों ने लाखों रुपये इन्वेस्ट किए थे। कंपनी कार्यालय पर ताला लटकने के बाद कंपनी अधिकारी निवेशकों की कॉल उठा रहे थे। 

वहीं निवेशकों को जल्द ही कार्यालय खोलने का आश्वासन दे रहे थे लेकिन अब कंपनी अधिकारियों ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिए हैं। गांधी चौक हमीरपुर में चल रहे एफडी और आरडी के लिए खोले निजी कंपनी कार्यालय पर ताला लटक गया है। कंपनी के अधिकारी कार्यालय बंद कर फरार हो गए हैं। ऐसे में आरडी जमा करवाने पहुंच रहे उपभोक्ताओं को कार्यालय पर ताला लटका देख वापस लौटना पड़ रहा है। 


हालांकि कंपनी में 500 से अधिक निवेशकों ने लाखों रुपये इन्वेस्ट किए हैं। ऐसे में अचानक कंपनी कार्यालय में ताला लटकने से निवेशकों की धुकधुकी बढ़ गई है। कार्यालय पर ताला लटका देख निवेशकों ने कंपनी अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने जल्द ही कार्यालय खोलने का आश्वासन दिया। अब कंपनी अधिकारियों के मोबाइल स्विच ऑफ हो गए हैं। ऐसे में निवेशक कंपनी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। 

हैरत की बात है कि कंपनी ने बीते करीब दो साल से मैच्योर एफडी और आरडी का भुगतान भी उपभोक्ताओं को नहीं किया था। कोर्ट केस का हवाला देकर कंपनी अधिकारी उपभोक्ताओं को मैच्योरिटी देने से मना कर रहे थे लेकिन अब कंपनी कार्यालय बंद होने से उपभोक्ताओं को भी एफडी और आरडी की राशि डूबती नजर आ रही है।  एएसपी डॉ. शिव कुमार का कहना है कि पुलिस के पास इस बारे में अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी दो कंपनियां लगा चुकी हैं लाखों की चपत 
जिला मुख्यालय में 2016 में एफडी, आरडी और हेल्थ इंश्योरेंस का कारोबार करने वाली दो निजी कंपनियां लोगों का लाखों रुपये डकार फरार हो चुकी हैं। इनमें एक कंपनी का प्रदेश स्तरीय कार्यालय हमीरपुर में था। इसमें एक हजार से अधिक निवेशकों ने लाखों रुपये इन्वेस्ट किए थे। बाकायदा पुलिस थाना में कंपनी के फरार होने का मामला दर्ज है। हैरत यह है कि करीब दो दर्जन ऐसे निवेशक हैं जिन्होंने फरार हो चुकी तीनों कंपनियों में लाखों रुपये इन्वेस्ट किए हैं। दो कंपनियां फरार होने के बावजूद निवेशकों ने तीसरी कंपनी में लोगों से लाखों रुपये इन्वेस्ट करवाए थे।
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