नोटबंदी के दौरान 10 करोड़ रुपये अपने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की दो फर्मों के खातों में जमा करवाने वाले उद्यमी के मामले की जांच आबकारी एवं कराधान विभाग (उड़नदस्ता) दक्षिण क्षेत्र ने पूरी कर ली है। जांच में टैक्स की अदायगी को लेकर भारी अनियमितताएं पाई गई हैं।
कारोबारी परवाणू से संबंधित है। मंडी समेत सूबे के अपने अन्य डीलर कारोबारियों को बिजली के उत्पाद बेचकर वैट (मूल्य वर्धित कर) और सीएसटी के नाम पर भारी वसूली करता रहा। बाद में टैक्स की रकम को करमुक्त दिखाकर सरकारी खाते में मात्र कुछ हजार डालकर सरकार और विभाग की आंखों में धूल झोंकता रहा। बाकी कालेधन के रूप में आरोपी अपनी जेब गर्म करता रहा।
अपने लग्जरी वाहन का टैक्स भी सरकार से माफ करवाता रहा। आबकारी एवं कराधान विभाग ने उसे 14 सितंबर को एक करोड़ 70 लाख का कर और जुर्माना लगाया है। कारोबारी ने करीब 25 लाख रुपये सरकार को दे दिए हैं। शेष राशि के लिए उसे दो माह का समय दिया गया है। यह केवल एक फर्म से संबंधित कार्रवाई की गई है। एक अन्य फर्म की जांच जारी है।
उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त उड़नदस्ता दक्षिण क्षेत्र डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि मामला सुलझाने में आबकारी एवं कराधान अधिकारी डॉ. अमित शोष्टा, इंस्पेक्टर रीमा सूद, इंसपेक्टर रूपेंद्र सिंह तथा इंस्पेक्टर कुलदीप शर्मा ने काफी सहयोग किया। 10 करोड़ की रकम को लेकर आयकर विभाग भी जांच कर रहा है।
यह है मामला
आबकारी एवं कराधान विभाग को सूचना मिली थी कि नोटबंदी के दौरान एक व्यापारी ने अपनी दो फर्मों के खातों में लगभग 10 करोड़ जमा करवाए हैं। व्यापारी की परवाणू स्थित दो फर्मों का फरवरी में निरीक्षण किया गया। शुरू में उसने जांच प्रक्रिया से बचने की कोशिश की, किंतु विभाग ने उसका टिन (टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर) ब्लॉक करने के साथ अन्य ऑनलाइन सेवाएं बंद कर दीं। इस पर व्यापारी को जांच प्रक्रिया में शामिल होना पड़ा। सितंबर में यह जांच पूरी हुई है।
ट्रक का सामान स्कूटर और बाइक नंबरों पर ढोया
व्यापारी प्रदेश के बाहर से प्रत्येक वर्ष करोड़ों का सामान लाता था, फिर इससे इलेक्ट्रॅनिक्स वस्तुओं का निर्माण करता था। वह इन तैयार वस्तुओं को प्रदेश में बेचता था तथा कुछ भाग प्रदेश के बाहर भी भेजता था। जांच में यह भी पाया गया कि विभागीय बैरियरों पर दर्शाए गए आयातित सामान और व्यापारी की ओर से रिटर्न पर अंकित आयात में काफी अंतर है। व्यापारी द्वारा भारी-भरकम सामान ढोने के लिए प्रयोग में दिखाए गए कुछ वाहन स्कूटर, मोटरसाइकिल या कारें थीं। इन पर भारी सामान ढोना संभव नहीं था। यही नहीं, प्रदेश के बाहर स्थित कुछ व्यापारी फर्जी भी पाए गए।
लग्जरी गाड़ियों का टैक्स भी करवाया माफ
व्यापारी ने अपने लिए खरीदी एक महंगी कार पर दिए टैक्स का कर भी अदायगी करते समय आईटीसी (इनकम टैक्स क्रेडिट) के रूप में क्रेडिट ले डाला। यह गोरखधंधा काफी समय से चल रहा था। पकड़े जाने पर व्यापारी ने फर्म की गलती तो कबूल तो कर ली, परंतु इस गलती का ठीकरा अपनी अकाउंट ब्रांच के सिर पर फोड़ दिया। यद्यपि जांच के दौरान यह पूरी तरह से सिद्ध हुआ कि असली दोष व्यापारी ही का था और वह जानबूझ कर इस टैक्स चोरी में संलिप्त था।