बीते वर्ष मैट्रिक का वार्षिक परीक्षा परिणाम 67.57 फीसदी रहा था। मैट्रिक परीक्षा में कुल 115311 विद्यार्थी बैठे थे। इसमें 76855 विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है, जबकि 16564 परीक्षार्थियों को कंपार्टमेंट घोषित की गई है।
वर्ष 2017 में एचपी बोर्ड कक्षा 10वीं की परीक्षा के नतीजों ने बेटियों ने एक बार फिर लड़कों को पछाड़ दिया था। मैट्रिक की टॉप-10 मेरिट सूची में सरकारी स्कूल की केवल एक ही छात्रा अपना नाम दर्ज करवाने में कामयाब हुई थी, जबकि शेष सभी टॉपर प्राइवेट स्कूलों के थे।
मेरिट में आए 33 विद्यार्थियों में से 26 स्थानों पर लड़कियों ने कब्जा किया था। सात लड़के ही मेरिट सूची में नाम दर्ज करवा पाए। मैट्रिक के वार्षिक परीक्षा परिणाम में निजी स्कूलों का दबदबा रहा।
सओएस (राज्य मुक्त विद्यालय) की मैट्रिक परीक्षा का परिणाम 52.41 फीसदी परिणाम रहा था। परीक्षा में 13,842 परीक्षार्थी बैठे थे। इसमें 7,254 परीक्षार्थी पास हुए, जबकि 5401 परीक्षार्थियों का परिणाम री-अपीयर रहा है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के मैट्रिक के वार्षिक परीक्षाओं में टॉपर देने में प्रदेश के छह जिले पिछड़ गए हैं। मैट्रिक में टॉपर देने में प्रदेश भर में बिलासपुर अव्वल रहा है। बिलासपुर से कुल 14 विद्यार्थियों ने टॉप टेन में नाम दर्ज करवाया है, जबकि कांगड़ा और ऊना पांच-पांच टॉपर के साथ दूसरे, हमीरपुर चार के साथ तीसरे, मंडी
तीन के साथ चौथे और सिरमौर दो टॉपर देकर पांचवें स्थान पर है। प्रदेश की राजधानी शिमला, कुल्लू, चंबा, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और सोलन एक भी टॉपर मैट्रिक में नहीं निकाल पाया है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के मैट्रिक के वार्षिक परीक्षाओं में टॉपर देने में प्रदेश के छह जिले पिछड़ गए हैं। मैट्रिक में टॉपर देने में प्रदेश भर में बिलासपुर अव्वल रहा है। बिलासपुर से कुल 14 विद्यार्थियों ने टॉप टेन में नाम दर्ज करवाया है, जबकि कांगड़ा और ऊना पांच-पांच टॉपर के साथ दूसरे, हमीरपुर चार के साथ तीसरे, मंडी
तीन के साथ चौथे और सिरमौर दो टॉपर देकर पांचवें स्थान पर है। प्रदेश की राजधानी शिमला, कुल्लू, चंबा, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और सोलन एक भी टॉपर मैट्रिक में नहीं निकाल पाया है।