सरकार ने 24 जून, 2016 को केंद्र की गाइडलाइंस का पालन करते हुए धर्मशाला में स्मार्ट सिटी प्रस्ताव को अमल में लाने के लिए कंपनी एक्ट 2013 के तहत एसपीवी (स्पेशल पर्पस व्हीकल कमेटी) का गठन किया था। इसे धर्मशाला स्मार्ट सिटी लिमिटेड का नाम दिया गया।
इसका काम प्रोजेक्टों की प्लानिंग, उनको अमल में लाना, मूल्यांकन, स्वीकृति और फंड देना, प्रबंधन, संचालन और निगरानी करना था। एसपीवी को प्रोजेक्टों के संचालन में निर्णय लेने की स्वायत्तता और स्वतंत्रता मिली। इसमें यह भी था कि स्मार्ट सिटी कंपनी का सीईओ और एमडी केंद्र की अनुमति बिना 3 वर्ष तक ट्रांसफर नहीं होगा।
पारदर्शिता लाने को लिया निर्णय : सरवीण
शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के मिशन को तय समय पर पूरा करने और उसमें पारदर्शिता लाने के लिए अधिसूचना जारी की गई है।
शहरी विकास विभाग के संयुक्त सचिव वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि हमने गाइडलाइंस की अवहेलना नहीं की है। पहली बैठक में खुद बीओडी ने सरकार को अपनी शक्तियां दे दी थीं। केंद्र की गाइडलांइस तो मोटी-मोटी चीजों को लेकर है। फाइनल डिटेल राज्य सरकार को ही वर्कआउट करनी होती है।
सरकार ने बीओडी को शक्तियां देने वाली पुरानी अधिसूचना रद्द नहीं की, बल्कि बड़े प्रोजेक्टों के बेहतर संचालन के लिए शक्तियां बांटीं हैं। नगर निगम धर्मशाला की मेयर रजनी व्यास ने कहा कि बीओडी की किसी भी बैठक में हमने अपनी शक्तियां सरकार को नहीं दी हैं। सरकारी अधिकारी झूठ बोल रहे हैं।
राष्ट्रीय मिशन निदेशक बोले - नहीं हो सकती अवहेलना
स्मार्ट सिटी के राष्ट्रीय मिशन निदेशक समीर शर्मा ने कहा कि गाइडलाइंस की अवहेलना किसी भी सूरत में नहीं की जा सकती है। अगर ऐसा हुआ है तो इसे चेक किया जाएगा।